धर्म का आतंकवाद से कोई सम्बन्ध नहीं : सुषमा स्वराज

( आभार : ANI )
भारत ने पहली बार विदेशी धरती पर शुक्रवार को दुनिया के इस्लामिक देशों के संगठन- ओआईसी (इस्लामिक कॉपोरेशन ओर्गनाशिएशन ) की बैठक में शामिल हुआ. देश का प्रतिनिधित्व करते हुए , विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपना पक्ष रखा और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी की ग़ैरमौज़ूदगी में उन्होंने आतंकवाद तथा उसे संरक्षण देने के कारण दुनिया में अलग-थलग पड़ चुके पाकिस्तान को निशाने पर लिया और बताया कि , ‘आतंकवाद से लड़ाई का मतलब किसी धर्म से टकराव नहीं है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘जैसे इस्लाम का शाब्दिक अर्थ है- शांति। अल्लाह के कई नामों में से किसी का भी अर्थ हिंसा नहीं है. वैसे ही दुनिया का हर धर्म शांति, सद्भावना और भाईचारे का संदेश देता है , उन्होंने महात्मा गाँधी के पाठ "रघुपति राघव राजा राम का भी उद्धरण प्रस्तुत किया "
वर्तमान समय में ‘आतंकवाद का सतत विस्तार हो रहा है. यह लगातार बढ़ते आंकड़े के साथ इंसानी ज़िंदगियाें को लील रहा है, ऐसे में आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई को किसी सभ्यता या संस्कृति के साथ टकराव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक़्सर कहते हैं- ये लड़ाई मानवीय मूल्यों और अमानवीय ताक़तों के बीच है.’
सुषमा स्वराज ने अपनी बात काे प्रभावशाली ढंग से समझाने के लिए ऋग्वेद के एक श्लोक का भी उल्लेख किया, ‘एकं सत् विप्रा: बहुधा वदन्ति.’ फिर उन्होंने इसका अर्थ भी बताया कि सत्ता या ‘परमसत्ता (ईश्वर) एक है, ज्ञानीजन उसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं.’ ओआईसी के विदेश मंत्रियों की यह दो-दिवसीय बैठक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी आबु धाबी में हो रही है. इस बैठक के लिए यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्लाह बिन ज़ाएद अल नाहयान ने खुद सुषमा स्वराज को ‘विशिष्ट अतिथि’ के तौर पर आमंत्रित किया है।










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