बुद्ध और राम : सनातन धर्म
जागरण: आज भारत में भगवान श्रीराम और भगवान बुद्ध को लेकर प्रमुख ईसाई संघर्ष खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। मेरे विचार में इस संघर्ष में न तो भारतीय संस्कृति की वास्तविक परंपरा को शामिल किया गया है और न ही बौद्ध साहित्य का गंभीर अध्ययन किया गया है। बौद्ध साहित्य के शिलालेख ज्योतिष (जातक संख्या 461) में स्वयं बुद्ध अपने पूर्वजन्म की कथा सुनते हैं। उस कथा में राजा दशरथ, रामपंडित, लक्ष्मण, भरत और सीता जैसे स्तंभों का उल्लेख है। कथा के अंत में बुद्ध स्वयं रामपंडित को बोधिसत्व यानी अपने पूर्वजन्म के रूप में पहचानते हैं। सीता को यशोधरा, दशरथ को शुद्धोदन और अन्य कथाओं को अपने समकालीन लोगों के पूर्वजन्म के रूप में दर्शाया गया है। मेरे विचार में यह कोई साधारण बात नहीं है। यदि बौद्ध परंपरा स्वयं रामपंडित को बुद्ध के पूर्वजन्म के रूप में प्रस्तुत करती है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि राम का चरित्र बौद्ध परंपरा में घोषित था। हालांकि रामायण का पूर्ण पुनर्कथन नहीं है, फिर भी राम, दशरथ, सीता और भरत जैसे कलाकारों का उपयोग यह बताता है कि बौद्ध साहित्य भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की गहराई से शुरू हुआ...














