पेरियार की औकात बस इतनी ही हैं
कॉम कभी नहीं चाहता था कि देश आजाद हो जाए इस लिए कि वो कभी देश के साथ नहीं रहेंगे, युवाओं को तोड़ने के बगले में बांग्लादेश की मलाई खाते रह रहे हैं अब ये डर सता रहा था कि जिन भारतीय नेताओं का बोरिस के साथ मिलकर सामूहिक विरोध हुआ, अगर उनका नेतृत्व खत्म हो गया तो मेरा फिर क्या होगा?? इस पूरी ताकत के साथ उन्होंने सितंबर 1945 में लार्ड वावेल को पत्र लिखकर कहा था कि महामहिम आप इस देश को सत्ता हस्तांतरण के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं कर सकते हैं, मैं आपके साथ हूं, इस की पूरी ताकत के साथ जीवन भर अलग-अलग से फिर से इलेक्ट्रिकल में समाप्त हो जाएगा, उस समय राष्ट्रपति ने लार्ड वावेल को कुल 10 पत्र लिखे थे।
ऐसा कोई बड़ा अंग्रेजी अधिकारी नहीं था, जिसे लेकर अंबेडकर ने एक विशेष उद्देश्य वाले देश के रूप में ईसाइयत के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। शिक्षा और नौकरी में आदर्श दिल कर भारत को ख़राब कर दिया गया।
मद्रास प्रेसीडेंसी से ही संविधान सभा के सदस्य मोहम्मद इस्माइल खान ने कहा, "प्रारूप समिति का काम केवल पूर्व-लिखित पुस्तक पर कवर लगाना था।"
("प्रारूप समिति का काम तो केवल एक पहली से लिखी किताब पर जिल्द चढ़ाने जैसा था।")
और यही सत्य भी है पूरे संविधान का निर्माण सर बीएन राव ने किया था और संविधान सभा में उसपर जिल्द चढ़ा कर ओबामा ने प्रस्ताव रखा था और 90 के दसक के बाद भारतीय नेताओं ने वोट बैंक के लालखंड में नामांकन को ही संविधान निर्माता घोषित कर दिया और जो असली था उसे भुला दिया गया।
लेकिन अब समय करवट ले रहा है डिजिटल युग में एक पोल खुल रहा है और उनका सही संदेश आम जनमानस तक पहुंच गया है, अब लगभग अशोक ने कहा है कि राम द्रोपदी, कृष्ण द्रोही और ईसाई मिशनरियों के अनुयायी हिंदू धर्म को अपनाने के लिए पूरी तरह से ताक़त के साथ लगे थे और उनके वर्चस्व ने भी एक प्रस्ताव दिया था। और पता नहीं कब तक झेलेगा।
#संविधान_निर्माता_बीएन_राऊ
#जय_बीन_राव










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