मुगलकालीन ऐतिहासिक धरोहर "सराय खुल्दाबाद का द्वार" के ध्वस्तीकरण के संदर्भ में इंटेक ने प्रयागराज प्रशासन को चेताया


    
         ( मुगलकलीन स्मारक सराय खुल्दाबाद का द्वार )

प्रयागराज:  इनटेक(national Indian trust for art and culture heritage) ने "मुगलकलीन स्मारक सराय खुल्दाबाद का द्वार" को ध्वस्त किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए, शासन को लिखित ज्ञापन देकर चेताया और फिर से सराय खुल्दाबाद द्वार को मुगलकालीन वास्तुकला के अनुरूप बनाने की मांग की है।

प्रयागराज में कुंभ के मद्देनजर रखते हुए, प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा बड़े पैमाने पर कार्य किया जा रहा था, जिसमें सड़कों का चौड़ीकरण व सुंदरीकरण भी शामिल था।

प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा ओल्ड जीटी रोड खुल्दाबाद स्थित राष्ट्रीय स्तर के मुगल कालीन स्मारक, सराय खुल्दाबाद का द्वार जो गेटवे ऑफ इलाहाबाद के नाम से भी जाना जाता था, उसे सड़क चौड़ीकरण योजना में 13 दिसंबर 2018 को विधि- विरुद्ध ढंग से ध्वस्त कर दिया गया था। इस संदर्भ में इंटेक प्रयागराज चैप्टर के कन्वीनर शंभूचोपड़ा और को- कन्वीनर अनुपम परिहार ने संयुक्त रूप से प्रयागराज प्रशासन को लिखित ज्ञापन सौंपकर इस दिशा में ध्यान आकर्षित किया है।

ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार खुल्दाबाद सराय के साथ-साथ खुल्दाबाद सराय का द्वार मुगल शासक सम्राट जहांगीर के आदेश पर बनवाया गया था। जोकि सरकार व पुरातत्व विधि-पुरातत्व विभाग के द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण, जर्जर अवस्था में पहुंच गया था, जिसका जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए था, उसे प्रयागराज का विकास प्राधिकरण द्वारा ध्वस्त कर दिया गया। ध्वस्तीकरण के पूर्व भी गेटवे ऑफ इलाहाबाद  को कई महीनों से लगातार संरक्षण करने का प्रयास, इंटेक द्वारा किया जा रहा था।

इंटेक द्वारा सराय खुल्दाबाद द्वार का 2009 में documention डॉक्यूमेंटेशन का कार्य किया गया था।इलाहाबाद डिस्ट्रिक्ट गजेटियर 1909 सहित दर्जनों ऐतिहासिक ग्रंथों में इस मॉन्यूमेंट के विषय में विस्तार से चर्चा है, इसे गेटवे आफ इलाहाबाद भी कहा जाता है।

प्रयागराज प्रशासन और प्रयाग-वासियों की जानकारी के लिए इस बात का उल्लेख करना सर्वथा उचित है कि प्रयागराज में जिस स्थान पर ऐतिहासिक सराय खुल्दाबाद का द्वार स्थित था, उस स्थान पर वहां के लोगों द्वारा अवैध कब्जा करके, अतिक्रमण करके, सड़क के किनारे दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है।

इंटेक ने इस ऐतिहासिक भूमि पर हो रहे अतिक्रमण पर संज्ञान लेते हुए, 25 मार्च 2019 को प्रयागराज प्रशासन को एक बार फिर चेताया और जनहित को देखते हुए इस अतिक्रमण को तत्काल प्रभाव से रोकने की अपील भी की।


इंटेक प्रयागराज चैप्टर के कन्वीनर संभू चोपड़ा ने प्रयागराज प्रशासन को लिखित ज्ञापन में स्पष्ट किया कि देश के संविधान में मूल अधिकार व कर्तव्य के प्रति हम नागरिकों को अपने अमूल्य विरासत व धरोहर को बचाने के लिए प्रेरित करते हैं, अन्यथा की दिशा में जनहित को देखते हुए भारत सरकार द्वारा संरक्षित तथा गैर संरक्षित स्मारकों के संरक्षण हेतु बनाए गए कानून, प्राचीन तथा ऐतिहासिक स्मारक और पुरास्थल तथा  ध्वंसावशेष अधिनियम 1958 तथा अन्य संबंधित सरकारी संस्थाओं के द्वारा बनाए गए नियमों तथा परिणामों के तहत अग्रिम कार्यवाही पर निश्चित तौर पर विचार किया जाएगा।

    इंटेक एक ऐसी संस्था है जो ऐतिहासिक व पुरातात्विक तथा विभिन्न सांस्कृतिक मूल्यों को अपने आप में समेटे हुए, विरासत और धरोहरों को संरक्षण प्रदान कराने हेतु सतत प्रयास करती रहती है।

इंटेक्स ने सराय खुल्दाबाद द्वार के ध्वस्तीकरण की तारीख 13 दिसंबर 2018 से लेकर अब तक, शासन -प्रशासन के सभी स्तरों पर, जिसमें कि जिला प्रशासन, मंडल प्रशासन, प्रयागराज विकास प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश सरकार तथा  सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार को लिखित ज्ञापन देकर, वहां हो रहे अतिक्रमण को रोकने और सराय खुल्दाबाद द्वार का, पुनः उसी मुगलकालीन वास्तुकला के साथ पुनः स्थापित व पुनर्निर्माण के लिए अपील की है।

 इंटेक के इतने प्रयासों के बाद भी शासन के विभिन्न स्तरों में से, किसी भी स्तर के शासन के कानों पर अभी तक जूं भी नहीं  रेंगें। सरकार को  निसंदेह विकास बड़े पैमाने पर करना चाहिए, लेकिन विकास और आधुनिकता की अंधी होड़ में अपने ऐतिहासिक स्थल और धरोहरों को नेस्तनाबूत करने के बजाय उनका जीर्णोद्धार करना चाहिए ।

हालांकि इस दिशा में इंटेक द्वारा किया जाने वाला सतत प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है।

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