परिवर्तन : अच्युतानंद मिश्रा
परिवर्तन : Achyutanand Mishra
आप सभी लोगों को सादर प्रणाम नमस्ते समय बदलता गया परिवर्तनशील मेरा देश आगे बढ़ता गया मैं भी यही चाहता हूं कि मेरा देश बढ़े मैं मेरे देश का प्रत्येक नागरिक बढ़े और इस देश में कुछ ना कुछ काम करें जिससे मेरे देश को विश्व गुरु बनने में थोड़ा कम समय लगे
विश्व गुरु बना सकते हो विवेकानंद के सपनों का मेरा देश बन सकता है महात्मा गांधी की कल्पना आज भी जिंदा है मेरे दोस्तों रात कितनी परेशानियों से गुजरे कितने करवट बदलते रहे हमें नींद आए या ना आए लेकिन सुबह सूर्य उदय होना है और उसमें हमें नई चेतना के साथ जागृत होकर के अपने कामों को प्रत्येक जिम्मेदारी से करना है
और यह भारत का प्रत्येक नागरिक अगर अपनी जिम्मेदारी ले तो मैं कहता हूं कि मेरा देश विश्व गुरु अपने आप बन सकता है
होली के इस पावन पर्व पर मैं आप सभी देशवासियों को हृदय की अंतरात्मा से शुभकामनाएं देता हूं और आपके जीवन में हमेशा नई चेतना के रंग जागृत होते रहे और वह चेतना के रंग से आप इस समाज इस परिवेश इस संस्कृति और धरोहर को अक्षुण्ण रखने का काम करेंगे
मैं आप सभी से निवेदन करता हूं आप सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि इस होली में आप वहां जाइए जहां कोई ना जाता हो आप लोग झुग्गी-झोपड़ियों के किनारे रहने वाले परिवार जो बसे हैं उनके साथ आप होली के रंग में रंग जाइए
आप अनाथालय जाइए अनाथ बच्चों के साथ होली के रंग में रंग जाइए और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं वह आप के मात्र पहुंचने से ही अपने आप को अभिभूत आनंदित मानेंगे और वह आप सभी लोगों को यह वादा करेंगे की होली की अग्नि में इतना प्रज्वलित हो जाएंगे वह इस देश को लव दिखाने का काम करेंगे और मेरा देश विश्व गुरु बनने का काम अपने आप करेगा
और आपको कुछ जानने की सोचने की समझने की जिज्ञासा बढ़ेगी ऐसा नहीं है कि आपका केवल समय नुक्सान होगा आपको भी बहुत कुछ सीखने की समझने की सोच विकसित होगी
अच्युतानंद मिश्रा चित्रकूट
आप सभी लोगों को सादर प्रणाम नमस्ते समय बदलता गया परिवर्तनशील मेरा देश आगे बढ़ता गया मैं भी यही चाहता हूं कि मेरा देश बढ़े मैं मेरे देश का प्रत्येक नागरिक बढ़े और इस देश में कुछ ना कुछ काम करें जिससे मेरे देश को विश्व गुरु बनने में थोड़ा कम समय लगे
विश्व गुरु बना सकते हो विवेकानंद के सपनों का मेरा देश बन सकता है महात्मा गांधी की कल्पना आज भी जिंदा है मेरे दोस्तों रात कितनी परेशानियों से गुजरे कितने करवट बदलते रहे हमें नींद आए या ना आए लेकिन सुबह सूर्य उदय होना है और उसमें हमें नई चेतना के साथ जागृत होकर के अपने कामों को प्रत्येक जिम्मेदारी से करना है
और यह भारत का प्रत्येक नागरिक अगर अपनी जिम्मेदारी ले तो मैं कहता हूं कि मेरा देश विश्व गुरु अपने आप बन सकता है
होली के इस पावन पर्व पर मैं आप सभी देशवासियों को हृदय की अंतरात्मा से शुभकामनाएं देता हूं और आपके जीवन में हमेशा नई चेतना के रंग जागृत होते रहे और वह चेतना के रंग से आप इस समाज इस परिवेश इस संस्कृति और धरोहर को अक्षुण्ण रखने का काम करेंगे
मैं आप सभी से निवेदन करता हूं आप सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि इस होली में आप वहां जाइए जहां कोई ना जाता हो आप लोग झुग्गी-झोपड़ियों के किनारे रहने वाले परिवार जो बसे हैं उनके साथ आप होली के रंग में रंग जाइए
आप अनाथालय जाइए अनाथ बच्चों के साथ होली के रंग में रंग जाइए और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं वह आप के मात्र पहुंचने से ही अपने आप को अभिभूत आनंदित मानेंगे और वह आप सभी लोगों को यह वादा करेंगे की होली की अग्नि में इतना प्रज्वलित हो जाएंगे वह इस देश को लव दिखाने का काम करेंगे और मेरा देश विश्व गुरु बनने का काम अपने आप करेगा
और आपको कुछ जानने की सोचने की समझने की जिज्ञासा बढ़ेगी ऐसा नहीं है कि आपका केवल समय नुक्सान होगा आपको भी बहुत कुछ सीखने की समझने की सोच विकसित होगी
अच्युतानंद मिश्रा चित्रकूट










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