बेलन घाटी एक बार फिर सुर्खियों में
कहा जा रहा है कि दशको बाद बेलन घाटी क्षेत्र से मिले इस हाथी के दांत से जीवन के विकास क्रम को जानने में सफलता मिलेगी। इसके साथ ही शोधार्थियों के लिए शोध के नए संदर्भ भी जुड़ेंगे। सफाई के बाद हाथी दांत को ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के प्रमिला श्रीवास्तव मेमोरियल संग्रहालय के प्रागैतिहासिक शिक्षण में रखवा दिया गया है।पुरातात्विक अध्ययन के लिए बेलन घाटी में पहली बार 70 के दशक में खुदाई कराई गई थी।
ईश्वर शरण परास्नातक महाविद्यालय के इतिहासकार और प्राचार्य डॉ आनंद शंकर सिंह ने सर्वेक्षण के लिए गई, टीम को बधाई देते हुए कहां की बेलन घाटी के डरिया में सर्वेक्षण के दौरान जीवाश्म के रूप में प्राप्त हुए हाथी दांत का वैज्ञानिक अध्ययन एवं सही आयु का आकलन करने के लिए परीक्षण कराया जाएगा ताकि उस दौर के जीवन के क्रमिक विकास की स्थितियों का और गहराई से अध्ययन किया जा सके।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ जमील अहमद के नेतृत्व में छात्रों की एक टीम ने अभी कुछ दिन पहले ही कोरावं तहसील के पुरातात्विक स्थल डैया पहुंची थी। यहां भ्रमण के दौरान इस टीम को जीवाश्म के रूप में तब्दील हाथी का दांत मिला, जिसकी लंबाई 41 सेंटीमीटर और गोलाई 8.5 सेंटीमीटर से लेकर 12 सेंटीमीटर तक है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ जमील अहमद के नेतृत्व में छात्रों की एक टीम ने अभी कुछ दिन पहले ही कोरावं तहसील के पुरातात्विक स्थल डैया पहुंची थी। यहां भ्रमण के दौरान इस टीम को जीवाश्म के रूप में तब्दील हाथी का दांत मिला, जिसकी लंबाई 41 सेंटीमीटर और गोलाई 8.5 सेंटीमीटर से लेकर 12 सेंटीमीटर तक है।
विंध्य पर्वत के कैमूर श्रृंखला के उत्तरी ढलान पर स्थित दया से देवघाट तक 18 मीटर ऊंचे अनुभाग में निम्न पूर्व पाषाण काल से लेकर नवपाषाण काल तक के क्रमिक विकास के कई प्रमाण चार से पांच दशक पूर्व ही मिल चुके थे।तब इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर जी आर शर्मा व उनकी टीम के द्वारा पुरातात्विक सर्वेक्षण कराया गया था।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरा- पशुओं की हड्डियों के विशेषज्ञ यूसी चट्टोपाध्याय का कहना है कि बेलन घाटी के डरिया में मिला जीवाश्म अमित हाथी दांत का टुकड़ा बेलन के निम्न पुरापाषाण कालीन अर्थात ग्रेवल प्रथम का प्रतीत होता है। उनके अनुसार इसकी आयु एक से सात वर्ष तक हो सकती है।
बेलन घाटी के कई पुरा स्थलों के उत्खनन से जुड़े रहे पुरातत्व व्यक्ति प्रोफ़ेसर डी मंडल का कहना है कि उस समय खुदाई के दौरान बेलन घाटी के प्रमुख ग्रेवल से भैंसा घोड़ा के साथ ही यानी हाथी के भी कई जीवाश्म प्राप्त हुए थे।
बेलन घाटी के कई पुरा स्थलों के उत्खनन से जुड़े रहे पुरातत्व व्यक्ति प्रोफ़ेसर डी मंडल का कहना है कि उस समय खुदाई के दौरान बेलन घाटी के प्रमुख ग्रेवल से भैंसा घोड़ा के साथ ही यानी हाथी के भी कई जीवाश्म प्राप्त हुए थे।












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