World Heritage Day विश्व धरोहर दिवस (18 अप्रैल)



प्रयागराज : विश्व धरोहर दिवस अथवा विश्व विरासत दिवस प्रयागराज चैप्टर द्वारा हिंदुस्तानी प्रयागराज मेंं मनाया गया। विश्धरोहर दिवस मनाए जाने का उद्देश्य यह हैै कि पूरे विश्व में मानव सभ्यता से जुड़े़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक के स्थलों के प्रति लोगों में जागरूकता लाई जा सके।

                                                   विश्व धरोहर दिवस (विडीयो)

विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर इंटेक द्वारा आयोजित हिंदुस्तानी अकेडमी में गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने अध्यक्षता किया और अर्ध कुंभ 2019 के दौरान मेला अधिकारी रहे विजय किरण आनंद भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अर्ध कुंभ के दौरान मेला अधिकारी रहे विजय किरण आनंद को इंटेक की तरफ से सकुशल और उत्कृष्टता व्यवस्थाओं के साथ अर्ध कुंभ के आयोजन से लेकर समापन तक किए गए उनके सराहनीय कार्यों के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने एक मोमेंटो प्रदान करके सम्मानित किया।


विजय किरण आनंद ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए बताया कि कुंभ मेले के सफल आयोजन का समापन करने में प्रयागराज प्रशासन के साथ-साथ प्रयागराज के नागरिकों, छात्रों, एनसीसी कैडेटों, स्काउट गाइड जैसी सारी ऐसी संस्थाओं का भी भरपूर सहयोग रहा है। गोष्ठी में कुछ स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा चित्रकला के माध्यम से ऐतिहासिक विरासत और धरोहरों आज को प्रदर्शित किया गया। छात्र-छत्राओं के इस चित्रकला की सराहना करते हुए विजय किरण आनंद और जस्टिस अरुण टंडन ने पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और उनका उत्साहवर्धन किया।


कार्यक्रम का संचालन करते हुए इंटर के को-कन्वीनर अनुपम परिहार ने बताया कि विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से सन 1900 से इनटेक द्वारा सरस्वती नाम की एक पत्रिका प्रकाशित की जाती रही है, जिसका प्रकाशन किसी कारणवश 1987 में रुक गया था। इंटेक के काफी संघर्षों और प्रयासों के पश्चात, अब 39 वर्ष के बाद एक बार फिर 2019 से सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ होगा जो इनटेक के साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी गर्व का विषय है।

विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर गोष्ठी में शिरकत कर रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर महेश चंद्र चट्टोपाध्याय ने प्राचीन प्रयाग से मध्य के इलाहाबाद और आज के प्रयागराज की शिक्षा, शिक्षालय व्यवस्था और उस की ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोगों को अपने अतीत के बारे में अधिक से अधिक जानकारी रखना चाहिए।

इस गोष्ठी में ईश्वर सरण पीजी कॉलेज के प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ जमील अहमद भी मौजूद रहे, जिन्होंने गेटवे ऑफ इलाहाबाद को संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से बड़े स्तर पर संघर्ष करते हुए,  इस मुद्दे को पत्र के माध्यम से लिखित ज्ञापन देकर  भारत सरकार तक पहुंचाया और इसके संरक्षण के लिए सतत प्रयत्नशील रहे हैं।


इंटेक्स प्रयागराज चैप्टर के कन्वीनर शंभू चोपड़ा ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए बताया कि किस तरह से इनटेक ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। लेकिन प्रशासन से उचित सहयोग और समन्वय न मिलने के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

इंटेक्स के अथक प्रयास के बाद भी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के संदर्भ में उसे असफलता ही मिल रही है जैसे गेटवे ऑफ इलाहाबाद का ध्वस्तीकरण। इंटेक द्वारा दी गई जानकारी को दृष्टि पत्र में रखते हुए, अर्ध कुंभ के दौरान मेला अधिकारी रहे विजय किरण आनंद ने इस बात का आश्वासन दिया कि अब ऐतिहासिक विरासत और धरोहरों को संरक्षण प्रदान करने के लिए प्रयागराज प्रशासन इंटेक के साथ कदम से कदम मिलाकर मिलाकर चलेगा और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए इंटेक को हर संभव सहायता प्रदान करेगा।
इंटेक प्रयागराज चैप्टर के कन्वीनर शंभू चोपड़ा ने ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पुनः इंटेक की प्रतिबद्धता को दोहराया।



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