भारत की आर्थिक कूटनीति
प्रयागराज: आर्थिक कूटनीति लोक कूटनीति से ही जुड़ाा हुआ है। लोक कूटनीतिि शब्द शब्द काा प्रयो सर्वप्रथम गुलियन ने किया था जो अमेरिकी विचाारक थे। अपने आर्थिक उद्देश्य व हितों की पूर्ति केेे लिए दूसरेेेे राष्ट्रों के साथ संबंधों में बुद्धि चातुर्य कौशल तथा संसाधनों का समुचित प्रयोग ही आर्थिक कूटनीति है।
भारतीय आर्थिक कूटनीति के उद्देश्य
1. भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाना उनके लिए नए बाजारों की खोज करना तथा व्यापार वार्ताओं में अनुकूल शर्तें प्राप्त करना
2. भारत में पूंजी निवेश को बढ़ाना तथा दूसरे देशों में भारत के सरकारी व निजी पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना।
3. अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी व निरंतरता हेतु आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं तकनीकों तथा ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति को सुनिश्चित करना।
4 आधार पर आपसी लाभकारी आर्थिक व विकास साझेदारी को बढ़ाना जैसे जी-20
5. वर्तमान विश्व की प्रमुख चुनौतियां जैसे वित्तीय संकट जैसे वेनजुएला ड्र
दिवालिया हो था। मनमोहन सिंह के प्रयास से ही भारत दिवालिया होते-होते बचा। पाकिस्तान भी दिवालिया हो गया होता लेकिन अमेरिका द्वारा उसे अपने 51 अन्य राज्य के रूप में अपनाया जाने के कारण अभी तक बचा है।
6. वर्तमान विश्व की प्रमुख संकट पर्यावरण खाद्य सुरक्षा के समाधान व प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना
7. विश्व शांति स्थायित्व तथा निरंतर विकास हेतु एक संतुलित वैश्विक आर्थिक व वित्तीय व्यवस्था को सुनिश्चित करना।
8. आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों पर एक समान दृष्टिकोण विकसित करना तथा विकासशील देशों के मुद्दों के समाधान का प्रयास करना।










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