ग्रीष्मावकाश के दौरान ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के भाषा केंद्र द्वारा संचालित विशेष पाठ्यक्रम का समापन सत्र हुआ संपन्न

प्रयागराज: ईश्वर शरण पोस्ट ग्रैजुएट कॉलेज के भाषा केंद्र द्वारा ग्रीष्मावकाश के दौरान इंग्लिश स्पोकन का विशेष कोर्स संचालित किया जाा रह था। इस विशेष कोर्स की समापन सत्र का आयोजन दिन शनिवार 8 जून 2019 को किया गया।

 जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में ईश्वर शरण पोस्ट ग्रेजुएट कालेज के प्राचार्य डॉ आनंद शंकर सिंह और भाषा केंद्र की समन्वयक डॉ रचना सिंह और भाषा केंद्र की रिसोर्स पर्सन डॉ कादंबरी शर्मा भी मौजूद रहीं।


 कार्यक्रम केेे प्रारंभ मेे ही सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन किया गया। समापन सत्र की शुरुआत किरण और कविता के द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना वी आर गैदरिंग टूगेदर इन टू हिम के साथ हुआ। कार्यक्रम केे शुरुआती दौर का संचालन जय किशोर और किरण ने किया। कार्यक्रम केेे दूसरे दौर का संचालन अतिन और तरुणा ने संभाला और मिस्टर अभिषेेक को कविता प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया । अभिषेक नेे अपनी poem ट्री को प्रस्तुत किया , जिसका सार यह था की वृक्षों और वनों के अभाव में जीवन निर्वाह कर पाना संभव नहीं है । समस्त प्राणियों के अस्तित्व के लिए वृक्षों और वनों का अस्तित्व में बने रहना आवश्यक है। इसके बाद विद्यासागर ने अंग्रेजी भाषा की मशहूर कविता इफ(if) प्रस्तुत किया ।इसके बाद आयुष सिंह ने शानदार आवाज में लाजवाब सॉन्ग  यु आर  कलर ऑफ माय ब्लड प्रस्तुुत किया। इसके पश्चात कार्यक्रम का संचालन कर रहे अतिन ने मां को समर्पित एक शानदार कविता सुनाया और इसकेे बाद जय किशोर कविता और गौरव ने वी शैल ओवर कॉम सम डे सुनाया।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे अतिन और तरुणा ने पुंडरीक तिवारी को पूरे पाठ्यक्रम पर फीडबैक प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया। पुंडरीक ने फीडबैक देते हुए बताया कि उन्हें इस कोर्स के बारे में कैसे पता चला और इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए वे क्यों उत्सुक हुए क्योंकि इस कोर्स में इंग्लिश स्पोकन के साथ साथ पर्सनालिटी डेवलपमेंट और कम्युनिकेशन स्किल को भी सम्मिलित किया गया था और यह भी बताया कि इस कोर्स को जॉइन करने से पूर्व अंग्रेजी बोलने में उन्हें किस तरह से संकोच और आत्मविश्वास की कमी महसूस होती थी और ऐसा न केवल उनके साथ ही नहीं बल्कि अन्य लोगों के साथ भी होता था और कोर्स के शुरुआती दौर में लगभग सभी में यह चीज है यह कमियां देखी गई।

                             

 लेकिन ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के भाषा केंद्र की प्रशिक्षक डॉ कादंबरी शर्मा और बीच में बाहर से बुलाई गई रिपर्सन गुंजन ने विभिन्न कार्यक्रमों और नीतियों के तहत जैसे समूह चर्चा अभिनय कहानी लिखना और सुनाना किसी विशेष मुद्दे पर वाद विवाद करना आदि के माध्यम से सभी विद्यार्थियों के सभी प्रकार के संकोच को दूर करने और आत्मविश्वास को बढ़ाने का सतत और निरंतर प्रयास किया गया और इसके साथ ही साथ सभी के व्यक्तित्व के विकास और लोगों से बात करने की विशेष शैली और साक्षात्कार की कुछ विशेष तकनीकी बताई गई ।

 पुंडरीक ने यह भी बताया कि इस पूरे पाठ्यक्रम के दौरान कैसे वे और अन्य प्रशिक्षण भी समूह चर्चा अभिनय कहानी लेखन और कहानी सुनाना वाद विवाद आदि के माध्यम से आत्मविश्वास को बढ़ाने में सफल रहे। स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि यह पूरा कोर्स बहुत ही उपयोगी रहा है तथा  इस कोर्स के दौरान सभी प्रशिक्षार्थियों ने न केवल सीखा बल्कि बहुत कुछ सीखा है।

  इसके  तुरंत बाद समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित ईश्वर शरण पोस्ट ग्रैजुएट कॉलेज के प्राचार्य डॉ आनंद शंकर सिंह को उनके अध्यक्षीय भाषण के लिए आमंत्रित किया गया। ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के भाषा केंद्र द्वारा संचालित किए जा रहे इस विशेष पाठ्यक्रम के समापन सत्र के अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में सभी प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए अंग्रेजी भाषा के महत्व को रेखांकित किया और बताया की दुनिया की किसी भी भाषा को सीखने से ज्यादा आसान और सरल है अंग्रेजी भाषा को सीखना।

अंग्रेजी भाषा के महत्व को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि यदि आप अंग्रेजी भाषा नहीं जानते और बहुत कुछ जानते हैं तो आपका जीवन थोड़ा दूभर होगा लेकिन यदि आप बहुत कुछ नहीं जानते हैं और अंग्रेजी भाषा को जानते हैं तो आपका जीवन थोड़ा आसान होगा । आसान का तात्पर्य जिंदगी जीने से नहीं है अंग्रेजी ही वह भाषा है जिसमें आप अपने को प्रोफेशनली कमर्शियल ई रूप से खड़ा कर दुनिया से इंटरलिंक कर सकते हैं और इस बात को मानने में हम सभी को कोई भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी भाषा की पहुंच दुनिया के छोटे-छोटे देशों से लेकर बड़े देशों तक भी है ।

अंग्रेजी भाषा एक ग्लोबल वैश्विक भाषा है अतः हमें वैश्विक संपर्क के लिए इस भाषा को जानना आवश्यक हो जाता है। हिंदी आज भी दुनिया में व्यापार की मजबूत भाषा नहीं है जबकि अंग्रेजी तो व्यापारियों की ही भाषा है। व्यापार करने के उद्देश्य से आए अंग्रेजों ने विभिन्न देशों को अपना उपनिवेश बना लिया और इस दौरान अपनी भाषा को भी विश्व भर में में प्रसारित किया। और इसके पीछे अंग्रेजों की विशेष रणनीति और उद्देश्य था की भले ही कभी हमारा राजनीतिक शासन इन देशों से समाप्त हो जाए लेकिन मानसिक शासन तो बना ही रहेगा।

वर्तमान समय में विभिन्न देशों को उपनिवेशवाद से मुक्ति तो मिल चुकी है लेकिन इस उपनिवेश की भाषा से आज भी मुक्ति नहीं मिली है और आगे ना जाने कब मिलेगी भी या नहीं। उन्होंने कहा कि भारत में हिंदी के विकास के लिए आजादी के बाद से ही इतना कुछ हो रहा है लेकिन फिर भी आजादी के बाद से लेकर अब तक एक भी राष्ट्रीय अनुवाद संस्था नहीं है जो दुनिया की सारी भाषाओं में हो रहे नए नए शोधों का हिंदी भाषा में अनुवाद उपलब्ध करा सके।

दुनिया में हो रहे नए नए शोधों का हिंदी ही नहीं अपितु समस्त भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद किया जाना चाहिए और उनकी प्रासंगिकता बनी रहे इस बात को ध्यान में रखते हुए लोगों तक वे शोध विषय पहुंच जाने चाहिए।उन्होंने बताया कि भारत में कोई राष्ट्रीय अनुवाद संस्था ना होने के कारण विश्व भर में जितने भी नए शोध शुरू हो रहे हैं वे जब तक भारत में भारतीय भाषा में पहुंचता है तब तक विश्व में उसकी प्रासंगिकता ही समाप्त हो चुकी होती है इसलिए भारत सरकार को भी इस दिशा में ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस भाषा केंद्र में आपने जो कुछ भी सीखा है जितना भी सीखा है इसको आप अभ्यास में लाइए और इस अभ्यास की निरंतरता को बनाए रखिए तो आप निश्चित रूप से इस भाषा में और प्रवीण हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में ग्रीष्मावकाश के दौरान विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार के अल्पकालिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं और इसका सभी विद्यार्थियों को निश्चित रूप से लाभ लेना चाहिए।

भाषा केंद्र द्वारा संचालित इस विशेष पाठ्यक्रम के समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन भाषा  केंद्र की समन्वयक डॉ रचना सिंह द्वारा दिया गया। डॉ रचना सिंह धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि इस भाषा केंद्र की मेरुरज्जु भाषा रिसोर्स पर्सन डॉ कादंबरी शर्मा है और इन्हीं के प्रयास से ही इस भाषा केंद्र की सार्थक परिणाम निरंतर देखने को मिलते रहते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि आपको अंग्रेजी भाषा 30 दिनों में कोई नहीं सिखा सकता इसके लिए आपको निरंतर अभ्यास करते रहने की आवश्यकता है भाषा सीखने का सबसे बेहतर तरीका है अभ्यास और केवल अभ्यास ।

 यहां से निकलने के बाद भी आपको इस भाषा की निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए और इसी में आपके द्वारा लिए गए इस प्रशिक्षण की सार्थकता सुनिश्चित होगी।

इसके बाद डॉ कादंबरी शर्मा ने समापन सत्र को संबोधित किया और उन्होंने महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ आनंद शंकर सिंह और भाषा केंद्र के समन्वयक डॉ रचना सिंह से मिल रहे निरंतर सहयोग को रेखांकित करते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया और डॉक्टर आनंद शंकर सिंह को केक काटकर इस समापन सत्र को समाप्त करने के लिए आमंत्रित किया और इसके पश्चात विभिन्न यादगार क्षण लिए हुए इस सत्र का सत्रावसान हुआ।

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