अयोध्या का फैसला


  अयोध्या केस में सुप्रीम ने कोर्ट आज अपना ऐतिहासिक निर्णय दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यों वाली पीठ ने लगातार 40 दिनों की सुनवाई के पश्चात यह निर्णय दिया। सुप्रीम कोर्ट के पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबडे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे। यह पीठ 6 अगस्त से लगातार सुनवाई कर रही थी और 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और 9 नवंबर की तारीख को फैसला सुनाने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर किसी भी प्रकार का दंगा ना फैले इस बात को ध्यान में रखते हुए संबंधित क्षेत्र में धारा 144 लागू की गई है
आज 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन को मंदिर बनाने के लिए दी और सरकार को आदेश दिया कि वह ट्रस्ट बनाकर 3 महीने के अंदर कार्य शुरू करें। और मुस्लिम पक्ष विवादित जमीन पर अपने एकाधिकार को सिद्ध करने में असफल रहे इसलिए उन्हें वैकल्पिक जमीन मस्जिद निर्माण के लिए प्रदान करने का आदेश सरकार को दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय थे हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन बंटवारे के फैसले को गलत ठहराया और विवादित जमीन पर राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण करने का निर्णय दिया जो कि वर्तमान में विवादित क्षेत्र पर सरकार का नियंत्रण है इसलिए सरकार को 3 महीने के अंदर ट्रस्ट बनाकर कार्य प्रारंभ करने का आदेश दिया और यह स्पष्ट किया कि विवादित क्षेत्र पर केवल राम मंदिर ही बनेगा।
मुस्लिम पक्ष अपने साथियों से यह सिद्ध नहीं कर पाए कि विवादित जमीन पर उनका ही एकाधिकार है इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक स्थान के रूप में मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया। प्रेम कोर्ट ने शेष बची अन्य सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया ।

फैसले से संतुष्ट नहीं है मुस्लिम पक्ष

मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन फैसले में कई विरोधाभास है लिहाजा हम फैसले से संतुष्ट नहीं हैं उन्होंने कहा कि हम फैसले का मूल्यांकन करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।

खैरात नहीं लेंगे 5 एकड़ जमीन

ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूं साथ ही मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को यह कहकर मानने से इनकार कर दिया कि खैरात की जमीन नहीं ले सकते।ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिन्होंने मस्जिद गिराई आज उन्हीं को सुप्रीम कोर्ट कह रही है कि ट्रस्ट बनाकर मंदिर बनाइए। उन्होंने कहा कि हम अपने कानूनी अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। हिंदुस्तान का मुसलमान इतना गिरा नहीं कि वह 5 एकड़ जमीन भीख मैं लेंगे। मुल्क हिंदू राष्ट्र के रास्ते पर जा रहा है संघ इसकी शुरुआत अयोध्या से करेगी।ओवैसी ने आगे कहा कि मैं अपने निजी घर का सौदा कर सकता हूं लेकिन मस्जिद की जमीन का सौदा नहीं कर सकता हूं।

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