ब्राह्मणवाद का रोना रोने वाले लोगों के लिए प्रश्न
ब्राह्मणों ने कहा - उठ जाओ, तो तुम उठ गए।
ब्राह्मणों ने कहा - बैठ जाओ, तो तुम बैठ गए।
ब्राह्मणों ने कहा - सो जाओ, तो तुम सो गए।
ब्राह्मणों ने कहा - जाग जाओ, तो तुम जग गए.
ब्राह्मणों ने कहा - तुम यह पढ़ लो , तो तुमने वह पढ़ लिया।
ब्राह्मणों ने कहा - तुम मत पढ़ो , तो तुमने पढ़ना छोड़ दिया ।
ब्राह्मणों ने कहा - तुम कपड़े मत पहनो, तो तुम नंगे हो गए।
ब्राह्मणों ने कहा - तुम कूएं का पानी मत पीयो - तुमने पानी पीना छोड़ दिया.
ब्राह्मणों ने कहा - तुम मांस खाओ - तुमने मांस खा लिया।
ब्राह्मणों ने कहा - तुम शराब पी लो , तो तुमने शराब पी ली ।
ब्राह्मणों ने कहा - मंदिर मत जाना, तुमने मंदिर जाना छोड़ दिया.
ब्राह्मणों ने कहा - अपने कानों में पिघला हुआ सीसा डलवाओ, तुमने चुपचाप अपने कान आगे कर दिए .
एक हज़ार साल तक जो ब्राह्मण ने तुम्हें कहा , तुम चुपचाप मानते चले गए।
इतनी आज्ञाकारिता ?
इतना आज्ञाकारी तो कोई भगवान् का भक्त भी नहीं हुआ है.
तुझमें इतनी ब्राह्मण भक्ति क्यों, कहाँ से और कैसे आ गई ?
क्यों, क्यों और क्यों ?
क्या तुम्हारे पास अपना कोई दिमाग नहीं था ?
क्या तुम्हारे पास कोई आत्म-सम्मान नहीं था ?
क्या तुम्हारे शरीर में एक कतरा भी खून नहीं था ?
क्या उस ज़माने के ब्राह्मण शारीरिक रूप से इतने अधिक शक्तिशाली और बलवान हुआ करते थे ?
क्या तुम्हारे हाथ पैरों में बेड़ियाँ डाली हुई थीं?
किसने डाली थीं वे बेड़ियाँ ?
क्या उन दिनों में ब्राह्मणों का शासन हुआ करता था ?
कौन कौन से ब्राह्मण राजा थे वे ?क्या नाम थे उनके ? कहाँ कहाँ शासन था उनका ?
उन दिनों में जो राजा थे उन्होने ब्राह्मणों को इतनी खुली छूट क्यों दे रखी थी ?
क्या उन सब दिनों में ब्राह्मणों की संख्या तुम लोगों से कई गुणा अधिक थी ?
आखिर वे कौन कौन से इतने सशक्त कारण थे कि ब्राह्मण सैंकड़ों वर्षों तक तुम पर ज़ुल्म ढाते चले गए और तुम चुपचाप उन सब ज़ुल्मों को सहते चले गए ?
#ब्राह्मणों_को_कोसने_और_गालियां_देने_से_पहले_ऐसे #पचासों_प्रश्नों_के_सही_उत्तर_तो_तुम्हें_देने_ही_पड़ेंगे।
वरना बंद करो यह अनर्गल प्रलाप और रोना।*
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