जननायक डॉ राजेंद्र प्रसाद जी को हम सभी देशवासियों का शत शत नमन!
आज आजाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी की पुण्यतिथि है। डॉ राजेंद्र प्रसाद शालीन व्यक्तित्व के धनी थे और वे राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठकर भी लोक कल्याण के मुद्दों पर चिंतन करते रहे। ऐसे सहज स्नेहिल विद्वान और कर्मठ जननायक डॉ राजेंद्र प्रसाद जी को हम सभी देशवासियों का शत शत नमन!
1952 डॉ राजेंद्र प्रसाद देश के राष्ट्रपति पद को सुशोभित करने वाले प्रथम व्यक्ति बने। सामान्य तौर पर देखा जाए तो राष्ट्रपति पीएम और मंत्रिपरिषद के अनुसार ही काम करता और पिछले दो दशकों से राष्ट्रपति केवल प्रधानमंत्री की हां में हां मिलाने वाली भूमिका में ही नजर आते रहे हैं मानो ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति का उसके पद पर बने रहना प्रधानमंत्री की इच्छा पर भी निर्भर करता है।लेकिन डॉ राजेंद्र प्रसाद का 1957 तक राष्ट्रपति पद पर बने रहना नेहरू की इच्छा का परिणाम नहीं था। पंडित नेहरू और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद कई स्वभाव और मूलभूत दृष्टिकोणों का भेद था।पंडित नेहरू क्षेत्रीय संतुलन के नाम पर राजगोपालाचारी को राष्ट्रपति बनाना चाहते थे। अपने व्यक्तित्व के धनी डॉ राजेंद्र प्रसाद प्रधानमंत्री की हां में हां मिलाने वाली भूमिका से ऊपर उठकर अधिकांश मौके पर पंडित नेहरू की गलत नीतियों का मुखर होकर विरोध किया।
सर्वप्रथम डॉ राजेंद्र प्रसाद और नेहरू के बीच हिंदू कोड बिल के संबंध में मतभेद उत्पन्न हुए।तिब्बत को चीन के आंतरिक अंग के रूप में स्वीकार करने की शासन के दृष्टिकोण से भी डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद सहमत नहीं थे।केरल के साम्यवादी शासन के विरुद्ध कांग्रेसी आंदोलन 1959 को राष्ट्रपति नितांत अनुचित मानते थे। डॉ प्रसाद के दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री के द्वारा राष्ट्रपति को कैबिनेट के निर्णय की पूर्व सूचना भी नहीं दी जाती थी।डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा सोमनाथ मंदिर के उत्सव की अध्यक्षता दिसंबर 1950 में पटेल की शव यात्रा में भाग लेने और 1952 में वाराणसी यात्रा के अवसर पर श्रद्धा वर्ष पंडितों के पैर धोने के संबंध में नेहरू के विरोध को अस्वीकार करते हुए अपने विवेक के अनुसार कार्य किया।इस प्रकार राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद और पंडित नेहरू के बीच अनवरत मतभेद और तनाव की स्थिति देखी जा सकती क्योंकि डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का व्यक्तित्व हां में हां मिलाने वाला नहीं था सौभाग्य बस इन मतभेदों को सार्वजनिक रूप से व्यक्त नहीं किया।











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