फैकल्टी इन्डक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम का हुआ समापन
प्रयागराज: ईश्वर शरण पी0जी0 कालेज में आज चल रहे 30 दिवसीय फैकल्टी इन्डक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम का समापन हुआ। समापन समारोह की मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कला संकाय की डीन प्रो0 रंजना बाजपेयी थीं तथा विशिष्ठ अतिथि न्यूपा, नई दिल्ली के रजिस्ट्रर प्रो0 कुमार थे। अतिथियों का स्वागत कालेज के प्राचार्य प्रो0 आनन्द शंकर सिंह ने दिया।
मुख्य अतिथि प्रो0 रंजना बाजपेयी ने कहा कि प्रयागराज गंगा यमुना और सरस्वती के संगम के साथ-साथ ज्ञान, वैराग्य और त्याग की त्रिवेणी भी है। अपने उद्बोधन से देश के कोने-कोने से आये प्रतिभागियों में राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार करते हुए देश और समाज को जोड़ने की बात सिखायी। उन्हांेने कहा कि एक शिक्षक ही इस काम को बेहतर ढंग से कर सकता है। विशिष्ट अतिथि कुमार सुरेश ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बीच हमें अपने आप को सशक्त ढंग से स्थापित करना है। तेजी से बदल रहे परिवेश में शिक्षकों की भूमिका और भी बढ़ गयी है। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कालेज के प्राचार्य प्रो0 आनन्द शंकर सिंह ने कहा कि शैक्षणिक जगत की वैश्विक प्रतियोगिता में हम पिछड़ रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में भी निरन्तर गिरावट आ रही है। उन्होंने प्राचीन नालन्दा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन भारत में शिक्षा का स्तर विश्वगुरू का था। उन्होंने बदलते परिवेश व मापदण्डों में एक शिक्षक को कैसे शिक्षार्थी तैयार करने चाहिए, इस विषय पर अपने अनुभवों और सुझावों को प्रतिभागियों के समक्ष साझा किया।
मुंगेर विश्वविद्यालय, बिहार के डाॅ0 दीवान अकरम ने 30 दिनी कार्यक्रम की रिपोर्ट पढ़ी तथा आधा दर्जन से अधिक प्रतिभागियों ने अपने खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 शाइस्ता इरशाद तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक आनन्द सिंह ने किया। इस मौके पर कार्यक्रम सह-समन्वयक डॉ विकास कुमार, डाॅ0 शिवहर्ष सिंह, डाॅ0 धीरज चौधरी, डाॅ0 मनोज दुबे, डाॅ0 जमील अहमद, डाॅ0 हर्षमणि सिंह, डाॅ0 अखिलेश पाल सहित समस्त प्रतिभागीगण मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि प्रो0 रंजना बाजपेयी ने कहा कि प्रयागराज गंगा यमुना और सरस्वती के संगम के साथ-साथ ज्ञान, वैराग्य और त्याग की त्रिवेणी भी है। अपने उद्बोधन से देश के कोने-कोने से आये प्रतिभागियों में राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार करते हुए देश और समाज को जोड़ने की बात सिखायी। उन्हांेने कहा कि एक शिक्षक ही इस काम को बेहतर ढंग से कर सकता है। विशिष्ट अतिथि कुमार सुरेश ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बीच हमें अपने आप को सशक्त ढंग से स्थापित करना है। तेजी से बदल रहे परिवेश में शिक्षकों की भूमिका और भी बढ़ गयी है। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कालेज के प्राचार्य प्रो0 आनन्द शंकर सिंह ने कहा कि शैक्षणिक जगत की वैश्विक प्रतियोगिता में हम पिछड़ रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में भी निरन्तर गिरावट आ रही है। उन्होंने प्राचीन नालन्दा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन भारत में शिक्षा का स्तर विश्वगुरू का था। उन्होंने बदलते परिवेश व मापदण्डों में एक शिक्षक को कैसे शिक्षार्थी तैयार करने चाहिए, इस विषय पर अपने अनुभवों और सुझावों को प्रतिभागियों के समक्ष साझा किया।
मुंगेर विश्वविद्यालय, बिहार के डाॅ0 दीवान अकरम ने 30 दिनी कार्यक्रम की रिपोर्ट पढ़ी तथा आधा दर्जन से अधिक प्रतिभागियों ने अपने खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 शाइस्ता इरशाद तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक आनन्द सिंह ने किया। इस मौके पर कार्यक्रम सह-समन्वयक डॉ विकास कुमार, डाॅ0 शिवहर्ष सिंह, डाॅ0 धीरज चौधरी, डाॅ0 मनोज दुबे, डाॅ0 जमील अहमद, डाॅ0 हर्षमणि सिंह, डाॅ0 अखिलेश पाल सहित समस्त प्रतिभागीगण मौजूद रहे।












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