पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का गहन विश्लेषण मार्क ने यह सिद्ध किया कि यह व्यवस्था शोषण पर आधारित है मार्च का अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत ही वह सिद्धांत है जिसके द्वारा वह यह सिद्ध करने का प्रयास करता है कि 35 अंकों का शोषण करते हैं इसी सिद्धांत का प्रतिपादन मार्च ने अपनी पुस्तक दास कैथल में किया है अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत मूल्य के सिद्धांत पर आधारित है इस सिद्धांत के अनुसार अंत में किसी वस्तु का विनिमय मूल्य उसके उत्पादन में लगाए गए सामाजिक दृष्टि से लाभदायक श्रम की मात्रा पर निर्भर करता है।
मार्क्स अपने अतिरिक्त मूल्य सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए प्रत्येक वस्तु के दो तरह के मूल्य बताता है पहला उपयोगिता मूल्य और दूसरा है विनिमय मूल्य।
उपयोगिता मूल्य
कार्ल मार्क्स ने उपयोगिता मूल्य और विनिमय मूल्य के मध्य अंतर किया है। उपयोगिता का अर्थ है कि मनुष्य की इच्छा पूरी करना जो मनुष्य की इच्छा पूरी करता है उसके लिए उपयोगी है अतः वह मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण और मूल्यवान होती है जो वस्तुएं उसकी इच्छा पूरी नहीं करती है वे उसके लिए उपयोगी ना होने से कोई मूल्य नहीं रखते जैसे रेगिस्तान में बालू बहुत अधिक होती है और पानी की कमी पाई जाती है पानी अधिक उपयोगी है और बालू की कोई उपयोगिता नहीं है पानी मनुष्य की प्यास बुझाने के काम आता है अतः बालू की तुलना में पानी अधिक मूल्यवान है
विनिमय मूल्य
मूल्य का दूसरा आधार विनिमय इसे विनिमय मूल्य कहते हैं विनिमय मूल्य वह अनुपात है जिसके द्वारा वस्तुओं के बदले विनिमय हो सके उपयोगिता की वस्तु हुए बिना किसी वस्तु का मूल्य नहीं हो सकता लेकिन हर उपयोगी वस्तु का विनिमय मूल्य होना आवश्यक नहीं है खाने की वस्तु होने के कारण रोटी का उपयोग मूल्य है लेकिन जब रोटी बेचा जाता है उस समय उसका दूसरा मूल्य है जिसे हम विनिमय मूल्य कहते हैं मार्च के अनुसार किसी वस्तु का विनिमय मूल्य उस वस्तु के उत्पादन पर खर्च किए गए सामाजिक रूप से आवश्यक श्रम की मात्रा पर निर्भर करता है यह मूल्य का मानदंड है यदि 5 गेहूं का विनिमय मूल्य 10 गज कपड़ा है तो उसका कारण यह है कि 5 मण गेहूं पैदा करने में उतना ही शर्म लगता है जितना 10 गज कपड़ा उत्पन्न करने में मार्क्स ने स्पष्ट किया कि वस्तुओं का विनिमय मूल्य उसके उपयोग मूल्य पर निर्भर नहीं करता बल्कि उसके उत्पादन पर लगाए गए संघ की मात्रा पर निर्भर करता है।
अतिरिक्त मूल्य
मार्क्स के अनुसार पूंजीवादी व्यवस्था में मजदूर अपनी श्रम शक्ति बेचता तथा मजदूरी प्राप्त करता है हर मजदूर अपनी मजदूरी से ज्यादा काम करता है तथा अधिक मूल्य पैदा करता है मार्च के अनुसार हर वस्तु का विनिमय मूल्य उस पर लगे मानव श्रम के बराबर होता है पूंजीपति लाभ वस्तु को बेचकर नहीं कमाता बल्कि उत्पादन में मजदूरों को उसके काम के अनुपात में कम मजदूरी देकर लाभ अर्जित करता है अतिरिक्त मूल्य मजदूर द्वारा प्राप्त मजदूरी तथा मजदूर द्वारा उत्पादित किए गए मूल्य का अंतर है अतिरिक्त मूल्य की परिभाषा इस प्रकार दी गई है जितना मूल्य श्रमिकों के जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक है उसके अतिरिक्त जो मूल्य उन्होंने उत्पादित किया है वह अतिरिक्त मूल्य है जो पूंजीपतियों की जेब में चला जाता मार्च के अनुसार अतिरिक्त मूल्य उन दो मूल्यों का अंतर है जिसे एक श्रमिक पैदा करता है उदाहरण के लिए मजदूरी के नियम के अनुसार दैनिक मजदूरी की दर ₹5 कारखाने में काम करने वाले मजदूर उसे मजदूरी के मूल्य अर्थात ₹5 की वस्तुएं 4 घंटे में ही बना लेते हैं किंतु कारखाने का मालिक उसे से 8 घंटे काम लेता है इसका तात्पर्य यह है कि वह दिन भर में ₹10 मूल्य की वस्तुएं उत्पादित करता है किंतु कारखाना मालिक ₹5 उसे लेकर प्रतिदिन ₹5 अपनी जेब में डाल लेता है मार्क्स के अनुसार यह अतिरिक्त मूल्य श्रमिकों को मिलना चाहिए किन कारखाना मालिक उसके श्रम की चोरी करता है यह चोरी उसका लाभ है इसी से पूंजी का निर्माण होता है लाभ का कोई भी अंश मजदूरों को नहीं दिया जाता किसी अतिरिक्त लाभ के एकत्रीकरण से ही मोदी बनती है मार्क्स के अनुसार पूंजी की परिभाषा है अतिरिक्त मुनाफे को प्राप्त करने के लिए लगाए गए समस्त उत्पादन के निजी साधनों का भोग अतः पूंजी श्रम का शोषण पहले के समाज में जिस प्रकार के दासो एवं अर्ध दासो का शोषण हुआ है उसी प्रकार पूंजीवादी युग में श्रमिक वर्ग का शोषण होता है । श्रमिक अपनी सेवाओं और श्रम को पूंजीपति को प्रदान करते हैं, लेकिन उसके बदले में उन्हें जीवन निर्वाह के लिए योग्य पैसा भी नहीं मिलता पूंजी के मालिक उस अतिरिक्त मूल्य को हड़प लेते हैं मजदूरों के विरुद्ध पूंजीपतियों का यह शोषण कुचक्र बहुत समय से चल रहा है और इसका अंत पूंजीवाद के अंत के साथ नहीं हो सकेगा।
अतिरिक्त मूल्य सिद्धांत का महत्व
अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत में पूंजीवादी आर्थिक प्रणाली तथा उत्पादन व्यवस्था में छिपे शोषण जुल्म अत्याचार को वैज्ञानिक आधार पर स्पष्ट किया तथा समाजवादी अर्थव्यवस्था का समर्थन किया।
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