अमेरिका और तालिबान में हुआ समझौता

विश्व: वार्ताओंं के लंबे दौर के बाद बीते शनिवार को आखिरकार अमेरिका और अफगानिस्ताान के आतंकी संगठन तालिबान के बीच कतर की राजधानी दोहा मेंं शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो ही गया।
 तालिबान एक ऐसा आतंकी संगठन है जिसने विश्वव के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी घटनाओं को अंंजाम दिया है। तालिबान नेेेेे अफगानिस्तान के कई हिस्सों को अपने कब्जे में कर रखा था। अफगान और यू एस सैनिकों का तालिबान के साथ संयुक्तत रूप से युद्ध चल रहा था। लगभग 18 वर्ष से अफगानिस्तान में हो रहे अनवरत नरसंहार और रक्तपात को रोकने के लिए इस शाांति प्रस्ताव पर अमेरिका व तालिबान ने हस्ताक्षर किए। द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसाार तलिबान के उपनेता और मुख्य वार्ताकार मुल्लाह अब्दुल गनी बरादर ने और अमेरिकी दूत जल्माय खलीलजाद अमेरिका की ओर सेेे हस्ताक्षर किए। इस समझौते तालिबान और अफगान के साथ-साथ अमेरिका कतर और पाकिस्तान केे नेताओं के साथ साथ भारत समेत विश्व के कई देशों के प्रतिनिधियों नेे भी भाग लिया और इस ऐतिहासिक समझौते के गवाह बने। इस समझौते के तहत अमेरिका 14 महीने मेंं अपनी सेना वापस बुला लेगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि तालिबान से हुआ समझौता तभी कारगर साबित होगा जब तालिबान पूरी तरह से शांति कायम करने की दिशा में काम करेगा।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा की अब तालिबान एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होगा या लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपना ढांचा तैयार करेगा। एस जयशंकर ने यह भी कहा की आतंकवाद के खिलाफ भारत की मुहिम काम आई और पूरी दुनिया की इस पर नजर गई जिसमें जी-20 समूह के देश भी शामिल है। 

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