तो क्या अब नहीं बदलेगा इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम ?
प्रयागराज: तो क्या अब नहीं बदलेगा इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम ? क्या विश्वविद्यालय का नाम बदलना मंजूर है इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों शिक्षकों और कर्मचारियों को ? मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मांगा था जवाब विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने दिया न में उत्तर और कहा विश्वविद्यालय की गरिमामय पहचान के साथ छेड़छाड़ मंजूर नहीं।
हम आपको बता दें 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ और जब से वे मुख्यमंत्री बने तभी से उत्तर प्रदेश में नाम परिवर्तन का एक दौर शुरू हुआ क्या जिला, क्या कस्बा और क्या बाजार सब का नाम बदला जाने लगा। इसी बीच 2018 में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया। इलाहाबाद में चाहे इलाहाबाद विकास प्राधिकरण हो या फिर इलाहाबाद जंक्शन सबका नाम धीरे-धीरे बदला जाने लगा और नाम परिवर्तन की इसी श्रृंखला में इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर प्रयागराज विश्वविद्यालय करने की कवायद भी शुरू हो गई।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर प्रयागराज विश्वविद्यालय करने के संदर्भ में सरकार ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यकारी परिषद् ( The executive council of University of Allahabad) से सोमवार तक उसकी राय मांगी थी। विश्वविद्यालय ने अपने 15 सदस्यीय कार्यकारी परिषद संयुक्त राय से बनी फैसले को सरकार को भेज दिया है और परिषद ने अपने इस फैसले में सरकार से इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम ना बदलने की संस्तुति की है।
हम आपको बता दें कि कुछ महीने पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय उत्तर प्रदेश सरकार और तत्कालीन मंडलायुक्त ने विश्वविद्यालय के कार्यकारी परिषद से इस संदर्भ में उसकी राय मांगी थी हालांकि इस 15 सदस्य परिषद में से केवल 12 सदस्यों ने ही अपनी राय रखी और तीन सदस्यों ने अपनी कोई भी राय नहीं रखी और राय देने वाले सभी 12 सदस्यों ने विश्व विद्यालय का नाम ना बदलने के पक्ष में अपनी राय रखी।
एमएचआरडी द्वारा विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर यह बताया गया था कि नगर के प्रबुद्ध वर्ग के लोग इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर प्रयागराज विश्वविद्यालय करने के पक्ष में हैं अतः विश्वविद्यालय का कार्यकारी परिषद इस संदर्भ में सरकार को अपनी राय से अवगत कराए। एमएचआरडी द्वारा भेजे गए पत्र का जवाब इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद सोमवार को भेज दिया जिसमें विश्वविद्यालय का नाम ना बदलने की स्पष्ट संस्कृति किया है। अब देखना यह है कि इस संदर्भ में सरकार का अगला कदम क्या होगा ?
पूर्व का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाली इलाहाबाद विश्वविद्यालय का इतिहास 135 साल पुराना है इसकी स्थापना 23 सितंबर 1887 को हुई थी। इस विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को जन्म दिया, इस विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों ने राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, पत्रकार और बड़े-बड़े नौकरशाहों के पदों को सुशोभित किया है।











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