नाटो (NATO) - North Atlantic treaty organisation
नाटो एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य संगठन है जिसे कई राज्यों ने आपसी सुरक्षा सहयोग के उद्देश्य से बनाया था, जिसका मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में है।
संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में 4 अप्रैल 1949 को बेल्जियम कनाडा डेनमार्क आइसलैंड इटली लक्जमबर्ग नीदरलैंड नार्वे पुर्तगाल ब्रिटेन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने उत्तर अटलांटिक गठबंधन की स्थापना के लिए उत्तर अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर किए। यह संधि 24 अगस्त 1949 को लागू कर दी गई। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन जिसे संक्षेप में नाटो के नाम से भी जाना जाता है उसकी क्रियान्वित ई के लिए विधिवत सितंबर 1949 में स्थापित हुआ। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन 1952 में यूनान एवं टर्की 1955 में जर्मन संघीय राज्य (पश्चिमी जर्मनी), 1982 में स्पेन, 1999 में चेक गणराज्य हंगरी एवं पोलैंड शामिल हुए। 7 मार्च 2004 को रोमानिया बुल्गारीया, स्लोवाकिया लिथुआनिया, लाटविया, स्टोनिया और स्लोवेनिया द्वारा सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही नाटो सदस्यों की संख्या 19 से बढ़कर 26 हो गई। नोटों की 60 वीं वर्षगांठ पर आयोजित फ्रांस के स्ट्रासबर्ग शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल 2009 को 2 नए सदस्य अल्बानिया वक्त क्रोएशिया ने पहली बार पूर्व सदस्य की हैसियत से भाग लिया। इन्हें मिलाकर नाटो की कुल सदस्य संख्या 28 हो गई है।
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र प्रावधानों को मानते हुए इन स्वतंत्र सदस्य राज्यों के लिए एक राजनीतिक एवं सैनिक सुरक्षात्मक गठबंधन के रूप में कार्य करना है। यह संगठन सदस्य राज्यों में राजनीतिक सैनिक एवं आर्थिक क्षेत्रों के साथ-साथ वैज्ञानिक एवं अन्य सैनिक क्षेत्रों में सहयोग एवं संबंधी कार्य नीतियों द्वारा उन्हें साझा सुरक्षा प्रदान करता है।
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन के लिए की गई संधि में एक संधि प्रस्तावना तथा 14 अनुच्छेद शामिल है। प्रस्तावना में संगठन के उद्देश्य के संबंध में कहा गया है कि "संगठन सदस्य देशों के साझा हितों की अभिवृद्धि तथा सदस्य देशों के सामूहिक सुरक्षा के प्रयत्नों में एकता स्थापित करेगा।"
1991 में व्हाट्सएप पर के समाप्त होने तथा रूस के साथ अपने संबंधों में सुधार के बाद नाटो ने यूरोप में सुरक्षात्मक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी संरचना एवं नीतियों में मौलिक बदलाव किया है। अपनी भूमिकाओं में आए इस बदलाव का मुख्य कारण उत्तर अटलांटिक सहयोग परिषद के माध्यम से मध्य एवं पूर्वी यूरोपीय देशों तथा पूर्व सोवियत संघ से अलग हुई राज्यों के साथ निकट सुरक्षात्मक संबंध बनाना था। उत्तर अटलांटिक सहयोग परिषद (एन ए सी सी) की स्थापना नाटो के नए नीतिगत दृष्टिकोण के मुख्य अंग के रूप में दिसंबर 1991 में की गई थी। 1997 में यूरो अटलांटिक पार्टनरशिप काउंसिल (ई ए पी सी) ने उत्तर अटलांटिक सहयोग परिषद का स्थान ले लिया। यूरो अटलांटिक पार्टनरशिप काउंसिल नाटो के सदस्य देशों तथा 27 साझा देशों को निकट लाने का प्रयास करती है। 1994 में नोटों की ब्रुसेल्स शिखर बैठक में पार्टनरशिप फॉर पीस प्रोग्राम की शुरुआत की गई जिसका उद्देश्य संपूर्ण यूरोप में राजनीतिक व सैन्य सहयोग को मजबूत करना था। पार्टनरशिप फॉर पीस में 28 सदस्य राज्यों के अतिरिक्त आज अन्य 27 राज्य भी शामिल है।
1995 में नाटो के नेतृत्व में बहुराष्ट्रीय क्रियान्विति सेना ने बोस्निया में जॉइंट इंडेवर नाम से सैनिक ऑपरेशन किए। यह सैनिक हस्तक्षेप संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1031 के अंतर्गत किया गया। मार्च 1999 में कोसोवो समस्या के संबंध में युगोस्लावियाके राष्ट्रपति के साथ वार्ता का दौर विफल होने के बाद सर्व सैन्य ठिकानों पर 78 दिन तक लगातार श्रृंखलाबद्ध हवाई हमले किए। जून 1999 में संयुक्त राष्ट्र आदेश के तहत कोसोवो में नाटो के नेतृत्व में शांति स्थापनार्थ सेना स्थापित की गई। एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत 27 मई 1997 को पेरिस में नाटो एवं रूस में एक विपक्षी सहयोग के मसौदे पर हस्ताक्षर किए।इसके तहत यूरो अटलांटिक क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग एवं सुरक्षा तथा शांति की स्थापना के लिए नाटो रूस स्थाई साझा परिषद के रूप में एक नए फोरम का गठन किया गया। इसी प्रकार नाटो का भूमध्य सागरी देशों (मिस्र, इजराइल, जाडन, मॉरिटानिया, मोरक्को, ट्यूनीशिया) के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए एक समिति 'भूमध्यसागरीय सहयोग समूह' का गठन किया गया। बाद में मार्च 2000 में अल्जीरिया ने भी इसमें स्वयं को जोड़ लिया।नाटो ने एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत सितंबर 2001 में प्रथम बार अपने चार्टर की धारा 5 का प्रयोग किया। यह धारा सामूहिक सुरक्षा से संबंधित है तथा इसके अंतर्गत किसी भी एक देश पर आक्रमण होने पर सभी देश सामूहिक रूप से आक्रामक के विरुद्ध कार्यवाही का अधिकार रखते हैं।11 सितंबर 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले के बाद नाटो ने सितंबर 2001 में आक्रामक (अलकायदा ओसामा बिन लादेन तथा तालिबान शासन)के विरुद्ध अपने चार्टर की धारा 5 के अंतर्गत कार्यवाही की घोषणा की।
नाटो के प्रमुख अंग-
उत्तर अटलांटिक परिषद-
यह संगठन का सर्वोच्च नीति नियंता निकाय है। इसमें सभी 19 सदस्य राज्यों के स्थाई प्रतिनिधि रहते हैं। इसकी सामान्यतः सप्ताह में एक बैठक होती है। इसकी उच्च स्तर पर बैठकर विदेश मंत्रियों तथा शासन अध्यक्षों के रूप में भी होती है।यह गठबंधन के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए उत्तरदाई उच्चतम निकाय है जो सहयोगी इकाइयां समितियां बनाता है। इसका अध्यक्ष महासचिव कहलाता है।
सैनिक समिति- यह समिति परिषद के अधीन होती है। यह समिति परिषद तथा रक्षा योजना समिति को सैन्य मामलों में सिफारिशें करती है तथा गठबंधन के सैन्य कमांडरों को निर्देश देती है। इसमें सदस्य देशों के सैन्य अधिकारी प्रतिनिधियों के रूप में अस्थाई रूप से मिलते हैं, परंतु सदस्य देशों के सैन्य प्रमुखों की बैठक 2 वर्ष में एक बार होती है।
नाटो का 25 वां शिखर सम्मेलन 20 21 मई 2012 को अमेरिका के शिकागो में संपन्न हुआ।शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान से नाटो के सैनिकों की वापसी के बाद संभावित स्थिति पर विचार किया गया। नाटो बलों के साजो सामान की आपूर्ति के लिए मार्ग उपलब्ध कराने के लिए पाकिस्तान पर सम्मेलन में दबाव बनाया गया।










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