गीता का उद्देश्य :-
जीवन का हर पल निर्णय का पल है ,प्रत्येक पद पर दूसरे पद का निर्णय करना पड़ता है ,और निर्णय अपना प्रभाव छोड़ जाता है। आज किये गये निर्णय भविष्य में सुख एवं दुख का कारण बनतें हैं। न केवल अपने लिये अपने परिवार के लिये और आने वाली पीढ़ियों के लिये भी । जब कोई दुविधा सामने आती है तो मन व्याकुल हो जाता है। निर्णय का वो पल युद्ध बन जाता है और मन बन जाता है युद्धभूमि । अधिकतर निर्णय हम दुविधा का उपाय करने के लिए नहीं ब्लकि केवल मन को शान्त करने के लिए करते हैं। क्या युद्ध से जूझता हुआ मन सही निर्णय ले सकता है । वास्तव मे शांत मन से जो निर्णय करता है वो अपने लिये सुखद भविष्य बनाता है दूसरी ओर अपने मन को शांत करने के लिए जो निर्णय करता है वो व्यक्ति अपने लिये कांटो भरा वृक्ष लगाता है।
-Taruna patel










वास्तव में
ReplyDeleteबहुत ही अनुपम है गीता के उद्देश्य
it's good....
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