कोरोना के इस दौर मे B.Ed. व अन्य परीक्षाओं का आयोजन करके विद्यार्थियों को मौत के मुंह में झोंका जा रहा है।
आज 9 अगस्त को आयोजित B.Ed की प्रवेश परीक्षा मे विद्यार्थियों की जुटी भीड़ मे सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के समस्त निर दिशानिर्देशों का उल्लंघन होता हुआ नजर आया। कोरोना के इस दौर में और उसके बढ़ते प्रकोप से सरकार ने भलीभांति परिचित होने के बावजूद इस परीक्षा का आयोजन कराया है और ना केवल आयोजन कराया है बल्कि इस प्रवेश परीक्षा के लिए निर्धारित परीक्षा केंद्रों को भी 300 - 400 किलोमीटर दूर भेज दिया गया है इतनी लंबी यात्रा कोरोना के इस दौर में किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं दिखाई देती है। B.Ed के इस प्रवेश परीक्षा को देने में जान का जोखिम देखकर बहुत बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी इस परीक्षा को जिसके लिए उन्होंने फॉर्म भरते समय 1500 से रुपए खर्च किए थे उस परीक्षा को छोड़ दीया।
छात्रों के एक बड़े वर्ग ने इस परीक्षा के आयोजन के विरोध में आंदोलन भी किए और प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा लेकिन सरकार और प्रशासन ने छात्रों की एक न सुनी ।
कोरोना के इस दौर में जब देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है। इस महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए लोगों को घर में रहने की सलाह दी जाती है और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के दिशा निर्देश दिए जाते हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो इसलिए लॉक डाउन लगाया जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन करके विद्यार्थियों के एक बड़े वर्ग को मौत के मुंह में झोंका जा रहा है।
जी हां यह बात है उत्तर प्रदेश में कुरौना के इस दौर में जोर शोर से आयोजित हो रही विभिन्न परीक्षाओं की, जैसा कि सभी जानते हैं की सरकार करुणा के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए कितनी शक्ति के साथ लाख डाउन लग लगाती है और उसका पालन करवाने के लिए बल प्रयोग भी करती है। सरकार करुणा से बचने के लिए अपने दिशानिर्देशों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की बातें कहती हैं घरों में रहने के लिए कहती हैं ताकि स्थिति सामान्य रहे गंभीर ना हो सके।
लेकिन सरकार द्वारा महामारी के इस दौर में स्थिति को सामान्य दर्शाने की उसकी व्याकुलता ही है जिस से प्रेरित होकर देश के युवाओं किसान को जोखिम में डालकर विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन कर उन्हें मौतोन्मुखी किया जा रहा है। सरकार स्थिति को सामान्य दर्शाने की जो रणनीति अपना रही है कहीं यह स्थिति को और गंभीर ना कर दे।











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