संविदा नीति वापस लेने के संदर्भ में एक्सीड सोसाइटी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

जागरण: संविदा नीति वापस लेने के संदर्भ में एक्सीड सोसायटी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र।  मुख्यमंत्री को संविदा नीति को वापस लेने संबंधी पत्र में एक्सीड सोसाइटी के फाउंडर शिक्षक एवं समाजसेवी कुलदीप मिश्रा ने इस संविदा नीति से होने वाली नुकसान और युवाओं में जन्म लेने वाली हताशा और निराशा एवं इस संविदा नीति से समाज में जन्म लेने वाले शोषण भ्रष्टाचार आदि जैसे विषयों पर जो कि हमारे समाज को खोखला कर देने के लिए पर्याप्त है ऐसे अनेक गंभीर विषयों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान आकर्षित करने  के लिए युवा प्रतियोगियों के हित में यह पत्र लिखा।
एक शिक्षक समाज सेवी और एक जागरूक नागरिक होने के नाते उन्होंने संविदा नीति को वापस लेने संबंधी अपने इस पत्र में लिखा की वर्तमान समय में समूह "ख" वह समूह "ग" की सेवा नियमावली में व्यापक परिवर्तन किए जाने का प्रस्ताव जो राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस परिवर्तन के बाद इन वर्गों के कर्मचारी नियुक्ति के बाद सर्वप्रथम 5 वर्ष तक संविदा पर नियुक्त होंगे, जिनका हर छह माह पर कार्यालय अध्यक्ष, विभाग अध्यक्ष और शासन के अधिकारियों द्वारा मेजरेबल की परफॉर्मेंस इंडिकेटर के माध्यम से मूल्यांकन किया जाएगा तथा नियमित होने के लिए कर्मचारियों को मूल्यांकन में प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 60% अंक प्राप्त करना होगा, किसी भी दो छमाही में 60% से कम अंक पाने पर सेवा से वंचित कर दिया जाएगा।
इन तथ्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी लिखा कि इस नई प्रस्तावित सेवा नियमावली के अस्तित्व में आने से सरकारी सेवा में नियुक्त होने वाले नौजवानों का शोषण और कदाचार बढ़ेगा। नियुक्ति कर्मचारी 5 वर्ष तक के लिए अधिकारियों के बंधुआ मजदूर हो जाएंगे और अधिकारी वर्ग नई सेवा नियमावली के को तरह तरह से शोषण करने का कारण यह प्यार बना सकता है। संविदा कर्मचारियों का मूल्यांकन के नाम पर हर तरह से दमन और शोषण किया जाएगा। इससे मानसिक शारीरिक और वित्तीय शोषण होगा जिससे भ्रष्टाचार और शोषण चरम पर पहुंच जाएगा। हर 6 महीने में होने वाली मूल्यांकन समीक्षा के नाम पर नियुक्त कर्मचारियों से धन उगाही और अधिकारियों द्वारा उसे अपने निजी कार्य कराए जाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी जो आगे चलकर सरकारी कार्यालयों में जो व्यवस्था की जड़ बन जाएगी। यह व्यवस्था अत्यंत ही दोषपूर्ण अन्याय और शोषण को बढ़ावा देने वाली है। इसके लागू होने से सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचने की पूरी संभावना है तथा साथ ही कुछ लोग इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास करेंगे। इस प्रस्ताव को लेकर आम जनता खासकर युवा वर्ग में काफी नाराजगी दिख रही है। मैं हर हाल में अपने नौजवान छात्रों के साथ रहूंगा। अतः आपसे आग्रह है कि यदि समूह आवागा की सेवा नियमावली में ऐसा कोई परिवर्तन शासन यह सरकार के समक्ष प्रस्तावित है तो कृपया उसे निरस्त करें ताकि किसी अधिकारी को कर्मचारी के शोषण का हथियार ना मिली और आम जनमानस में सरकार की छवि कर्मचारी विरोधी बनने से बच सकें और हमारे देश के युवा प्रतियोगी छात्र शोषण से बच सकें।
प्रतियोगी छात्रों के बडे़ वर्ग ने एक्सीड सोसायटी और उसके फाउंडर शिक्षक एवं समाजसेवी कुलदीप मिश्रा का उनके इस प्रयास के लिए आभार प्रकट किया।


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