गांधीजी
जागरण: जब-जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा होती है तो अक्सर भारतीयों के दिमाग में यह प्रश्न उठता है की गांधीजी को यह पुरस्कार क्यों नहीं दिया गया?
यह एक बड़ा प्रश्न हो सकता है लेकिन लेकिन अभी भी इस प्रश्न का लिखित या सही जवाब नहीं मिला है।
गांधीवादी सोच रखने वाले तमाम नेताओं का मानना है कि गांधीजी ना सिर्फ एक नेता हैं बल्कि वहां एक विचारधारा और एक युग को लेकर चलने वाले नेता रहे हैं अभी तक गांधी जी को नोबेल दिलाने के लिए दो बार भारत सरकार द्वारा प्रयत्न किए गए हैं और शांति के नोबेल के लिए का नामांकन किया गया है। लेकिन नार्वे जियन कमेटी ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया है
गांधी जी का जीवन तमाम उतार-चढ़ाव और विवादों से भरा पड़ा रहा है कुछ लोग गांधी जी को भगत सिंह को फांसी तथा पाकिस्तान बंटवारे का जिम्मेदार मानते रहे हैं नॉर्वेजन कमेटी की सदस्य रह चुके डॉक्टर बताते हैं कि इस विषय पर दो बातें हो सकती हैं पहली यह की नोबेल पुरस्कार मरणोपरांत लोगों को नहीं दिया जाता रहा है तथा दूसरी यह हम बात हो सकती है की गांधीजी एक महान नेताओं में से एक रहे हैं कुछ लोगों का मानना है की 19वीं शताब्दी जितना वर्ल्ड वार के नाम से जानी जाती है उतनी ही गांधी जी की उपस्थिति भी 19वीं शताब्दी को महत्वपूर्ण बनाती है अतः यह कहा जा सकता है की गांधीजी का औरा कद नोबेल से बड़ा माना जा सकता है।
अतः तमाम गांधीवादी नेता इस बात से पूर्ण तरह सहमत हैं कि नोबेल गांधीजी को नहीं दिया जा सकता है क्योंकि गांधी खुद एक पुरस्कार हैं।
धन्यवाद।










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