जातिवाद की हाला बेचे राजनीति की मधुशाला

जातिवाद की हाला बेचे

 राजनीति की मधुशाला,

जाति जन्म का मूल खोजते

 घिस घिस कर टूटा प्याला,

साकी सोच खुले मन से तु

जाति एक है मानव जाति, 

पेस वासस्थान प्रवृत्ति को

जाति बनाती मधुबाला ?  


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