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जागरण: 


आँधियाँ जब तलक हैं, तब तलक तूफान जिंदा है।

साँसें चल रहीं हैं जब तलक, इंसान जिंदा है॥

 ज़ख्म यूँ ज़िस्म के मरहम से भर जाया नहीं करते।

दर्द कायम ही रहता है, अगर निशान जिंदा है॥

आवाजें कर बुलंद अपनी, उठाया क्यूँ नहीं करते।

तेरे तो लब भी जिंदा हैं, तेरी ज़ुबान जिंदा है॥

जिंदगी मौत का ये सिलसिला कायम रहेगा यूँ। 

लाशें जलती रहेंगी, जब तलक शमशान जिंदा है॥ 

मेरे आवाम की जिस्म, जन्नत, जान है हिंदी।

हिंदी जब तलक है, मेरा हिंदुस्तान जिंदा है।

                   "सौरभ शुक्ला"

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