माँ सुनती हो एक बात कहूं!

जागरण: 
"कोई सच्चा हमसफ़र अब कहां निकलता है,
अब तो दुश्मन यह सारा जहां निकलता है,
अच्छा या बुरा इंसान कैसा भी हो,
जिस्म पर चोट लगती जुबाँ से मां निकलता है! " 

मां सुनती हो एक बात कहूं। 

माँ सुनती हो एक बात कहूं,
मुझको भी अफ़सर बनना है!
पढ़ना है और लिखना है,
पढ़ करके अव्वल बनना है!

एक दिन तू स्वयं कहेगी कि,
 मुझे हिंदी पढ़ना आता है!
बेटा मेरा होशियार बहुत,
 इसे कलम पकड़ना आता है!

वह क्या था मां जो कहता था,
हां! अब अंग्रेजी पढ़ना है!
मां सुनती हो एक बात कहूं,
 मुझको भी अफसर बनना है!

बंदूक हाथ में होगी जब,
मैं सबको ही दौडाऊंगा!
जब थक जाएंगे पांव मेरे,
तब पास तेरे आ जाऊंगा!

मां मुझको पुलिस बना दो ना,
 डाकू और चोर पकड़ना है!
 मां सुनती हो एक बात कहूं,
 मुझको भी अफसर बनना है!

 जब पाऊंगा पैसे वेतन के,
 पायल 'दो भर' बनवा दूंगा!
 मैं रहूंगा वैसे दफ्तर में,
पर तुझ को घर बनवा दूंगा!

 सामान बांध तैयार रखो,
 अब छोड़ झोपड़ी चलना है!
मां सुनती हो एक बात कहूं,
 मुझको भी अफसर बनना है!

जितने भी कर्जे हैं तुझ पर,
वे सब चुकते हो जाएंगे!
यह अगल बगल वाले तुझको
तब ताने नहीं सुनाएंगे!

 सबके कर्जा हम दे देंगे,
ना किसी का बाकी रखना है!
मां सुनती हो एक बात कहूं,
मुझे को भी अफसर बनना है!

चापाकल भी लगवा दूंगा,
बस हत्था तुझे चलाना है!
 एक गैस खरीदूंगा तुझको,
तब चूल्हा नहीं जलाना है!

 मां सुला दे अपनी गोदी में,
 सुबह भी जल्दी उठना है!
 मां सुनती हो एक बात कहूं,
 मुझको भी अफसर बनना है!

               - सौरभ शुक्ला

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