हिंदू धर्म मरणोपरांत 'राम नाम सत्य है' क्यों बोला जाता है ? और श्री राम के जन्म के पूर्व भी शव यात्रा में क्या यही बोला जाता था ?

जागरण:   प्रति कल्पे भवेद्रामो प्रति कल्पश्च रावणः।


राम का जन्म केवल एक ही बार नहीं हुआ है। हर कल्प में राम व रावण का जन्म होता है। अद्भुत रामायण में इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है।

राम आदि और अनंत हैं शिव के कारक महामंत्र है।

इस समय श्वेतवाराह कल्प चल रहा है। कल्प संसार का सबसे विस्तृत समय माप के रूप में गिनीज बुक में दर्ज है।
Ans. 1
एक राम दसरथ का बेटा,। एक राम घट घट में लेटा । एक राम का सकल पसारा ।। एक राम तिहुँ लोक ते न्यारा । भगवान श्री राम से पूर्व भी राम का नाम मौजूद था ।एक कथा में वर्णन आया है कि श्री राम किन्ही बड़े ऋषि के आश्रम पहुंचे । ऋषि ने जिद की वे राम के भक्त हैं। राम उनके आराध्य है ,इसलिए वे राम के चरण छुएंगे । परन्तु राम ने कहा मैं दसरथ पुत्र राम हु , इसलिये मै ही लक्ष्मण सीता सहित आपको प्रणाम करूँगा । वाद विवाद के बाद यही तय हुआ कि राम ही पैर छुएंगे । दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां राम नाम का अर्थ आस्तित्व से है । परम् ब्रह्म से है ।मतलब यह कि मुश्किल और कठिन समय में भी हम राम नाम को याद करेंगे । यही गति याने रास्ता है । वे ही हमारे शास्ता हैं ।समाधान है ।राम नाम सत्य है ,सत्य बोले गत्य है , का यही अर्थ है ।परंतु शव यात्रा के समय बोले जाने के कारण हम डर जाते हैं । सनातन धर्म का यह मौलिक सिद्धान्त है ।हर मुश्किल में राम का नाम ही आसरा है ।
Ans.2
प्रिय मित्र हर जीव के शरीर में समस्त ब्रम्हांड स्थापित रहते हैं। अर्थात डिक्टोकोपि करके शरीर की रचना की गई है। इसलिये ब्रह्मांड शरीर के अदंर चक्रों के रूप में एक दुसरे की स्पोट में रखे हुए हैं। मनुष्य देव सुर पशु पक्षी ब्रह्मा विष्णु शिव महेश आदि सबमें जीव ही विराजमान हैं। ओर जीव ही कल्पना कर रहा है व रचना भी।

यदी जीव नहीं तो सब शव है। अर्थात शव को ईश्वर चला रहा है वही सत्य राम नाम है। इसलिये शव को ले जाते समय सत्य राम नाम को याद किया जाता है। परन्तु मनुष्य अक्षरों वाले राम नाम व शरीर के राम नाम पर उलझ जाता है। इसलिए जीव भ्रमित रहता है। असली सत्य राम 5 तत्वों 3 गुणों से प्राप्त नहीं होता ना ही इनमें रहता है। भाषाई अक्षरों में तो बिलकुल नहीं। वो बोली कल्पना ध्यान से न्यारा है। वह इन किसी भी क्रिया से प्राप्त नहीं होता। इसलिए असली सत्य राम का नाम कोई पुर्ण विवेकी विरला ही जान सकता है।

बाकी राम राम करके चिल्लाएगें। अर्थात असत्य राम को भजेगें। ये ॐ ही ब्रह्म है। समस्त शरीर व जितना भी आकार निराकार व साकार रुप है ये ॐ ही है अर्थात ब्रह्म ही है। ये 5 तत्व व 3 गुण व नाद है ये ब्रह्म ही है अर्थात असत्य। परन्तु जो इनको चलाए हुए हैं वह असली सत्य राम है। वही ॐ को भी आपको भी ताकत दे रहा है सम्मान रुप से।

परन्तु जीव इस ॐ के कारण ही भ्रमित बना हुआ है अर्थात अलख ज्योत निरजंन के कारण। इसलिए जीव असत्य राम को असली राम मान रहा है। जबकी मानने वाला जीव है ओर जानने वाला भी। सत्य राम नाम का वर्णन कोई शब्दों में कर ही नहीं सकता। गुणगान केवल ब्रह्म का किया जाता है राम का नहीं। राम तो गुणगान आपका स्वयं करता है ।बस आपने केवल जानना है भेद के द्वारा। नमस्कार सत बदंगी जी
Ramfal ji ka javab

Ans.3
 क्योंकि भगवान शिव भी स्वयं राम राम ईसी नाम मे समाधि मग्न होते है ।
Ramavtar ji

Ans.4
यहां शिव के निकल जाने से तो शव हो गया। राम का अर्थ इस जगत की रचना करनेवाला आरक्षण /पालन-पोषण करने वाला मारण संहार करने वाले पर ब्रह्म परमात्मा से है जो कि नित्य सत्य स्वरूप अविनाशी जन्म मृत्यु से परे सर्व शक्तिमान है।
Deepak chaudhary ji

Ans.5
 शवयात्रा में "राम नाम सत्य है", ऐसा क्यों बोला जाता है?
राम शब्द का अर्थ है – रमंति इति रामः जो रोम-रोम में रहता है, जो समूचे ब्रह्मांड में रमण करता है वह
राम आखिर क्या हैं ?…

[1]

राम जीवन का मंत्र है। राम मृत्यु का मंत्र नहीं है। राम गति का नाम है, राम थमने, ठहरने का नाम नहीं है। सतत वितानीं राम सृष्टि की निरंतरता का नाम है।
राम, महाकाल के अधिष्ठाता, संहारक, महामृत्युंजयी शिवजी के आराध्य हैं। शिवजी काशी में मरते व्यक्ति को(मृत व्यक्ति को नहीं) राम नाम सुनाकर भवसागर से तार देते हैं। राम एक छोटा सा प्यारा शब्द है। यह महामंत्र – शब्द ठहराव व बिखराव, भ्रम और भटकाव तथा मद व मोह के समापन का नाम है। सर्वदा कल्याणकारी शिव के हृदयाकाश में सदा विराजित राम भारतीय लोक जीवन के कण-कण में रमे हैं।
राम हमारी आस्था और अस्मिता के सर्वोत्तम प्रतीक हैं। भगवान विष्णु के अंशावतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम हिंदुओं के आराध्य ईश हैं। दरअसल, राम भारतीय लोक जीवन में सर्वत्र, सर्वदा एवं प्रवाहमान महाऊर्जा का नाम है।
वास्तव में राम अनादि ब्रह्म ही हैं। अनेकानेक संतों ने निर्गुण राम को अपने आराध्य रूप में प्रतिष्ठित किया है। राम नाम के इस अत्यंत प्रभावी एवं विलक्षण दिव्य बीज मंत्र को सगुणोपासक मनुष्यों में प्रतिष्ठित करने के लिए दाशरथि राम का पृथ्वी पर अवतरण हुआ है।
कबीरदासजी ने कहा है – आत्मा और राम एक है – आतम राम अवर नहिं दूजा।
राम नाम कबीर का बीज मंत्र है। रामनाम को उन्होंने अजपा जप कहा है। यह एक चिकित्सा विज्ञान आधारित सत्य है कि हम २4 घंटों में लगभग २१६०० श्वास भीतर लेते हैं और २१६०० उच्छावास बाहर फेंकते हैं। इसका संकेत कबीरदासजी ने इस उक्ति में किया है –
सहस्र इक्कीस छह सै धागा, निहचल नाकै पोवै।
मनुष्य २१६०० धागे नाक के सूक्ष्म द्वार में पिरोता रहता है। अर्थात प्रत्येक श्वास – प्रश्वास में वह राम का स्मरण करता रहता है।
दादूजी ने कहा है –
षट चक्र पवना फिरे, छः सहस्त्र एक बीस ।
योग अमर जम कूँ गीले, दादू बिसवा बीस ॥
राम शब्द का अर्थ है – रमंति इति रामः जो रोम-रोम में रहता है, जो समूचे ब्रह्मांड में रमण करता है वही राम हैं इसी तरह कहा गया है – रमते योगितो यास्मिन स रामः अर्थात् योगीजन जिसमें रमण करते हैं वही राम हैं।
इसी तरह ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है –
राम शब्दो विश्ववचनों, मश्वापीश्वर वाचकः
अर्थात् ‘रा’ शब्द परिपूर्णता का बोधक है और ‘म’ परमेश्वर वाचक है। चाहे निर्गुण ब्रह्म हो या दाशरथि राम हो, विशिष्ट तथ्य यह है कि राम शब्द एक महामंत्र है।

इसलिए कहा जाता है।
Ram Avdh pandey ji

Ans.6
असल मे वह "राम राम सत्य है" होता है। पर आजकल सब "राम नाम सत्य है" बोलने लगे।

एक बार सीता माता श्री राम जी के चरणस्पर्श करने के लिए झुकने लगीं। परंतु श्रीराम जी ने उन्हें ऐसा करने नही दिया, और बोले : राम रामाय नमः। राम रामाय सत्यम अस्ति। अर्थात, "हे सीता, अपने राम के चरणस्पर्श नही, उनकी आराधना करो जो आपके राम के भी राम हैं, राम के राम सत्य हैं।"

एक व्यक्ति के जीवनकाल में श्रीराम ( श्री विष्णु भगवान ) उसके पालनहार होते हैं। परंतु मरणोपरांत, राम के भी राम उसका लेखा जोखा लेते हैं और उसके कर्मो का आकलन करते हैं। इसलिए शवयात्रा में राम राम सत्य है बोला जाता है।
Aanand varma

Ans.7
राम का अर्थ क्या होता है ? अगर इसका अर्थ जानने वाले इसकी व्याख्या करें तो ये एक महाग्रंथ बन जाय।

बहरहाल, कम शब्दों में कहें तो राम का अर्थ है कण कण में विद्यमान होना, सृष्टि की शुरुआत से ही यह शब्द चला आ रहा है, और यही सत्य है ।

ये बोला तो उनके लिए जाता है जो लोग यात्रा में साथ होते हैं, कि अंत में सबकी यही गति होनी है इसलिए अपने जीवनकाल में ही राम नाम का जाप करते रहें, लेकिन दुर्भाग्यवश लोग सोचते हैं कि ये शव के लिए बोला जा रहा है।

अगर जीते जी ही राम नाम जपते रहते तो अन्त समय इसकी याद दिलाने की शायद जरूरत ही न पड़ती..
Karunesh shree

Ans.8
राम शब्द का प्रयोग ईश्वर और भगवान के पुकारने के लिए है वह महाशक्ति जिसका कोई रूप नहीं है जिसने सभी देवी देवताओं को बनाया है …… परंतु शिव एक सिर्फ एक देवता हैं….।

हमारे सनातन धर्म में जो सबसे बड़ी गलतफहमी है वह यही है कि ईश्वर भगवान राम और देवी देवता सबको मिक्स कर रखा है। देवी देवता सृष्टि को चलाने के लिए पदवी है जिन पर आसीन देवता बदलते रहते हैं। परंतु जो ईश्वर है वह सदा एक है… जिसके बारे में तुलसीदास जी ने भी लिखा है कि श्रीराम भी उसका गुणगान नहीं कर सकते

अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ। भए मुकुत हरि नाम प्रभाऊ॥
कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई। रामु न सकहिं नाम गुन गाई॥
Rajkumara sirohi

Ans.9
क्योंकि पद्म पुराण में कहा गया श्री राम परम सत्य है शिवजी श्रीराम के परम भक्त हैं शिवजी स्वयं राम नाम जपते हैं पद्म पुराण में कहा गया शिव जी भक्त रूप भगवान है स्कंद पुराण में कहा गया है शिवजी हरि के सेवक हैं
Madhusudan dad ji maharaj


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