एलोपैथी vs आयुर्वेद
" सियासत किस क़दर आवाम पर एहसान करती हैं
कि आँखे छीन लेती हैं और चश्मे दान करती हैं "
हम किसी एलोपैथी के विरोधी नहीं है और न आयुर्वेद के अंध समर्थक हैं ? हम विशुद्ध रूप से जो हमें पढ़ाया गया है और जो हमारे सिलेबस में है और जो जनहित में होना चाहिए उसके समर्थक हैं और जो शिक्षण उपरांत भी करने नहीं दिया जाता उसके विरोधी हैं ?
हम विरोधी है सरकार द्वारा समर्थित स्वास्थ्य विभाग की पक्षपाती नीतियों के ? जो केवल एक पैथी विशेष को पक्षपात पूर्ण सरक्षणार्थ मेडिकल कानून बना रही है हर मेडिकल कानून में एलोपैथी के चिकित्सको की नाजायज कमाई के लिए गुप्त एजेंडा छिपा होता हैं ?
एलोपैथिक चिकित्सको को फार्मा कम्पनी , पैथोलॉजी लैब , अल्ट्रा साउंड सी टी स्केन आदि से कमीशन ही नहीं आजकल एक नई परम्परा और पैदा हो गई हैं कि अपनी चिकित्सा डिग्री को भी भाड़े पर चलाने की , जिसको कोई भी झोलाछाप महीना बाँध कर किराये पर ले कर अपना अवैध अस्पताल ही नहीं पैथोलॉजी लैब , अल्ट्रा साउंड सेंटर , अपना शिक्षण संस्थान आदि खोल सकता है
तब फिर झोलाछाप चिकित्सको को कौन सरक्षण देता है देश के अंदर शहर से अलग ग्रामीण क्षेत्रों ( peripheral area ) में लगभग 65% पैथोलॉजी लैब अल्ट्रासाउंड सेंटर इन चिकित्सको की और लोकल स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से अनवरत सुचारू रूप से समाज को झोलाछाप चिकित्सा एवं अवैध लैब और डाइग्नोस्टिक सेंटर कार्यरत हैं इस प्रकार से भृष्ठाचार ने नई व्वसायिक सम्भावना को जन्म दे दिया है ?
सैय्या भये कोतवाल अब डर काहें का ?
अब बात करे आयुर्वेद स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सको के हितार्थ सरकारी संस्था C.C.I.M की तो इसमें तो प्रोसिजर (चिकित्सा कर्म ) के बारे मे स्पष्ट आवधारना ही नहीं है ।
सरकार की नीतियों ने एक प्रकार से आयुर्वेद के चिकित्सको को पढ़ा लिखा पंसारी बना दिया है ?
एम सी आई ने ओषधी के साथ साथ चिकित्सा कर्म और फिजिक्स के वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम से बने चिकित्सकीय उपकरणों पर भी आपना गैर कानुनी अधिकार जमा रखा है चिकित्सकीय उपकरण सब पैथी के चिकित्सको के लिए रोग परीक्षण के लिए बने हैं मगर एलोपैथी से अलग अगर कोई चिकित्सक रोग परीक्षण के उपकरण का प्रयोग करता है तो उसका प्रयोग दुरुपयोग बता कर थाने में रिपोर्ट ठोक दी जाती हैं क्या यही है चिकित्सको के कल्याण के लिए बनाए गये मेडिकल कानून ?
विज्ञान की आधुनिकता से विज्ञान पढ़ कर दाखला लिए हुये आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विद्यार्थियों को महरूम रखना न्याय संगत नहीं है ?
राजनेताओं और एलोपैथी माफियाओं की साजिश के बिना क्या ऐसे तुगलकी कानून सम्भव है ?
नही बिल्कुल नहीं ?
कुल मिला कर अगर देखा जाये तो सब कानुन जो चिकित्सको के कल्यान व सरक्षण के लिये बनाये गये उनको गलत व कपटपूर्ण परीभाषीत करके छल से बल से केवल आयूष चिकित्सको को हतोत्साहीत करने मे उनका मनोबल तोडने मे ईस्तमाल किया गया
बेशर्मी कि हद दिखा रही है शबाब में..
वो मुजरा तो कर रही है मगर! हिजाब में!!!
आयूर्वेद व आयूर्वेद चिकित्सक को इतना उत्पीड़न किया गया की कोई भी वर्तमान आयूर्वेद का चिकित्सक आपनी संतान को बी ऐ एम एस चिकित्सक नहीं बनाना चाहता और सरकार कहती हैं आयुर्वेद में विकास करो ?
यही कारण है सदियों पुरानी सहिंता से अलावा अन्य कोई सिद्धांत या सहिंता अब न बन पा रही हैं न प्रतिपादित हो पा रही हैं आयुर्वेद के विकास के इस विराम पर चिंतन करने की आवश्यकता है?
मैं समझता हूँ किसी विधि सम्मत स्थापित चिकित्सा पैथी का इससे ज्यादा अपमान ओर क्या हो सकता है ?
मेडिकल से सम्बंधित कानून जब तक आयुर्वेद के चिकित्सको का उत्पीड़न करते रहेंगे विकास तो दूर की बात है आयुर्वेद चिकित्सक अपने अस्तित्व के लिए ही जूझता रहेगा ?
आज समय की जरूरत है चिकित्सको के लिए बनाए गये कानूनों में जैसे एम टी पी एक्ट , ड्रग एन्ड कॉस्मेटिक एक्ट , पी सी पी एन डी टी एक्ट आदि अनेको कानूनों में चाहे आंशिक ही सही लेकिन भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिये ?
समन्वित चिकित्सा प्रणाली ( Integrated Medical System ) आज की जरूरत है और विश्व इसकी तरफ कदम बढ़ा भी चुका है
बीमार व्यवस्था में स्वस्थ समाज का सपना कैसे पूरा हो पायेगा
आभार :-डॉ देव सैनी











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