पृथ्वी की अचक्षांशीय स्थिति
जागरण: प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को शरद विश्व की स्थिति बनती है इस अवस्था में चोरी की सीधी तथा और धाधर किरण विषुवत रेखा पर पड़ती है और विषुवत रेखा पृथ्वी की सबसे गर्म स्थान रेखा बन जाती है।
इस अवस्था में पृथ्वी के उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध के ठिकाने क्षेत्र सौर्य ऊर्जा प्राप्त करते हैं और आधे क्षेत्र अंधेरे में रहते हैं उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध को सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा की मात्रा बराबर होती है जिसके परिणाम स्वरुप उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में ना तो अधिक जाना पड़ता है ना ही अधिक गर्मी पड़ती है अतः दोनों ही गोलार्ध में समान जलवायु पाई जाती है।
इस अवस्था में विषुवत रेखा और सभी अक्षांशों पर रात और दिन की लंबाई समान पाई जाती है अर्थात संपूर्ण पृथ्वी पर 23 सितंबर को 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात पाई जाती है।
कर्क संक्रांति 21 जून
जबकि करके सक्रांति की अवस्था में ऐसा नहीं होता। इस अवस्था सूर्य की सीधी किरणें कर्क रेखा पर पड़ती है और कर्क रेखा पृथ्वी की सबसे गर्म स्थान बन जाती है। इस अवस्था में उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु पाई जाती है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु पाई जाती कर्क संक्रांति की अवस्था में भूमध्य रेखा के सहारे रात और दिन की लंबाई बराबर पाई जाती है कर्क सक्रांति की अवस्था में यदि उत्तरी गोलार्ध की स्थिति देखें तो 21 जून को कर्क रेखा पर दिन लंबे और रातें छोटी हो जाती जबकि 6:30 छठ उत्तरी अक्षांश एवं उसके उत्तर में स्थित सभी स्थानों पर 24 घंटे का दिन पाया जाता है।
नार्वे नाम का एक देश साडे 66 अंश उत्तरी अक्षांश पर स्थित है इसलिए 21 जून की अवस्था में वहां 24 घंटे का दिन पाया जाता है इसीलिए इसे अर्धरात्रि के सूर्य वाला देश भी कहा जाता है। नार्वे के अलावा और कई देश 6:30 अंश उत्तरी अक्षांश पर स्थित है जैसे अलास्का कनाडा ग्रीनलैंड नार्वे स्वीडन फिनलैंड रूस इन सब देशों से होकर आर्कटिक वृत्त गुजरता है।
जबकि दक्षिणी गोलार्ध में करके सक्रांति की अवस्था में मकर रेखा के सहारे राते लंबी होती है और दिन छोटे होते। 6:30 अंश के दक्षिणी अक्षांश और उसके दक्षिण में स्थित सभी अक्षांशों पर 24 घंटे की रात होती है।










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