काव्य श्रंखला : सड़क सुरक्षा K.D. Singh
जागरण: काव्य श्रंखला : सड़क सुरक्षा
एक लंबी, छंद बद्ध कविता
**********************
काल गाल में रोज समाती
कितनों के जीवन की थाती
गलती तो अपनी ही है फिर,
सड़कें कातिल क्यों कहलाती ?
मोबाइल पर कवर लगाती
कापी पर जो ताव चढ़ाती
क्यों चलती बिन हेलमेट पीढ़ी
सीट बेल्ट क्यों नहीं लगाती ?
जीवन के अनमोल क्षणों को
गंवा रहे क्यों जल्दी मे
सब्र का फल मीठा होता है
उड़े जा रहे क्यों जल्दी में
सुरसा सा मुंह खुला हुआ है
लम्बी लहराती सड़कों पर
गति को रोचक मान रहे जो
उनकी ही दुर्गति सड़कों पर
थोड़ी चिंता, थोड़ा संयम
सफर सुरक्षित, गति थोड़ी कम
जीवन के ये स्वर्ण सूत्र हैं
इनका ध्यान रखो तुम हरदम
नियम हमारे लिए बने हैं
सुखद सफर के ये सपने हैं
नियमों से क्यों नफरत करना
क्यों जोखिम से नाता रखना ?
अपनों की आंखें तकती हैं
आशाओं की लौ जलती है
सकुशल आने की उम्मीदें
कितनी ही मन्नत रखती हैं
जीवन एक समर सा दुर्गम
उस पर सफर, नियति है निर्मम
चलना अपनी मजबूरी है
चाहे कितनी भी दूरी है।
यदि दोपहिया पर है चलना
सर को सदा सुरक्षित रखना
शिरस्त्राण की भांति हेलमेट
सर पर निश्चित धारण करना
गति को सदा नियंत्रित रखना
नियमों पर संकेन्द्रित रहना
धीर-अधीर सभी सड़कों पर
सबसे बच कर संयत रहना
चौपहिया हो अगर तुम्हारी
औऱ अधिक है जिम्मेदारी
सीट बेल्ट तत्काल लगाओ
पीछे वालों को समझाओ
अन्यमनस्क होकर मत चलना
ध्यान सड़क पर केंद्रित रखना
मादक द्रव्य सफर के दुश्मन
इनसे भी बच करके रहना
कितनी आवश्यक परिचर्चा
चलते समय फोन पर चर्चा ?
जीवन से बहुमूल्य नहीं कुछ
क्यों करना जीवन का खर्चा ?
सड़कों पर जो संकेतक हैं
सुखद यात्रा के प्रेरक हैं
सूचित करते उनमें से कुछ
कुछ निर्देशों के द्योतक हैं
अनुपालन उनका करना है
जो सड़कों की संरचना है
तीव्र मोड़ पर गति धीमी हो,
ओवरटेक नहीं करना है
कोई घायल गिरा पड़ा हो
गिने आखिरी सांसें अपनी
रुक कर उसकी मदद करें तो
मानवता प्रस्तुत हो अपनी
एक नागरिक भी मरता है
एक युवा होता अपंग भी
देश भी थोड़ा मर जाता है
घायल होता राष्ट्र अंग भी
अपना अपना कर्म निभाओ
थोड़ी सी शुचिता अपनाओ
रखो सुरक्षित खुद को थोड़ा
राष्ट्र धर्म मे हाथ बटाओ
अपनी जो ये नव पीढ़ी है
राष्ट्र प्रगति की ये सीढ़ी है
अनुशासन में बांधो इसको
बड़े प्रेम से साधो इसको
जब बच्चा छोटा होता है
उसको चलना हमीं सिखाते
इन सड़कों पर चलने लायक
इन बच्चों को हमीं बनाते
इनको शिष्टाचार सिखाते
अनुशासन का पाठ पढ़ाते
फिर इनको हम वाहन देकर
सड़क नियम क्यों नहीं बताते ?
भावुकता में वाहन देकर
अनुमति देकर अपने मन से
अपने नाबालिग बच्चों को
करें न छल उनके जीवन से
चलना अब आसान नहीं है
सड़कें हैं, मैदान नहीं है
प्रतिपल परिवर्तित होते इस
युग का पूरा ज्ञान नहीं है
नियमों से अनभिज्ञ रहे तो
कैसे जीवन चल पाएगा ?
एक जरा सी चूक हुई तो
घर का सूरज ढल जाएगा
कोमल ऊर्जस्वित पीढ़ी की
उर्जा भी तूफानी हो
लेकिन इतना ध्यान रहे
ना , सड़कों पर मनमानी हो
अपने इस संचित साहस को
सड़कों पर ना व्यर्थ करें
दुस्साहस से बचें सड़क पर
ऐसा नहीं अनर्थ करें
सड़कें सबके हित की साधक
इनके होते हैं कुछ मानक
इन पर चलें सम्भल कर हरदम
बनें न दुर्घटना के कारक...!
💐💐💐💐
@ के डी सिंह
11 दिसम्बर 2021
कितनों के जीवन की थाती
गलती तो अपनी ही है फिर,
सड़कें कातिल क्यों कहलाती ?
मोबाइल पर कवर लगाती
कापी पर जो ताव चढ़ाती
क्यों चलती बिन हेलमेट पीढ़ी
सीट बेल्ट क्यों नहीं लगाती ?
जीवन के अनमोल क्षणों को
गंवा रहे क्यों जल्दी मे
सब्र का फल मीठा होता है
उड़े जा रहे क्यों जल्दी में
सुरसा सा मुंह खुला हुआ है
लम्बी लहराती सड़कों पर
गति को रोचक मान रहे जो
उनकी ही दुर्गति सड़कों पर
थोड़ी चिंता, थोड़ा संयम
सफर सुरक्षित, गति थोड़ी कम
जीवन के ये स्वर्ण सूत्र हैं
इनका ध्यान रखो तुम हरदम
नियम हमारे लिए बने हैं
सुखद सफर के ये सपने हैं
नियमों से क्यों नफरत करना
क्यों जोखिम से नाता रखना ?
अपनों की आंखें तकती हैं
आशाओं की लौ जलती है
सकुशल आने की उम्मीदें
कितनी ही मन्नत रखती हैं
जीवन एक समर सा दुर्गम
उस पर सफर, नियति है निर्मम
चलना अपनी मजबूरी है
चाहे कितनी भी दूरी है।
यदि दोपहिया पर है चलना
सर को सदा सुरक्षित रखना
शिरस्त्राण की भांति हेलमेट
सर पर निश्चित धारण करना
गति को सदा नियंत्रित रखना
नियमों पर संकेन्द्रित रहना
धीर-अधीर सभी सड़कों पर
सबसे बच कर संयत रहना
चौपहिया हो अगर तुम्हारी
औऱ अधिक है जिम्मेदारी
सीट बेल्ट तत्काल लगाओ
पीछे वालों को समझाओ
अन्यमनस्क होकर मत चलना
ध्यान सड़क पर केंद्रित रखना
मादक द्रव्य सफर के दुश्मन
इनसे भी बच करके रहना
कितनी आवश्यक परिचर्चा
चलते समय फोन पर चर्चा ?
जीवन से बहुमूल्य नहीं कुछ
क्यों करना जीवन का खर्चा ?
सड़कों पर जो संकेतक हैं
सुखद यात्रा के प्रेरक हैं
सूचित करते उनमें से कुछ
कुछ निर्देशों के द्योतक हैं
अनुपालन उनका करना है
जो सड़कों की संरचना है
तीव्र मोड़ पर गति धीमी हो,
ओवरटेक नहीं करना है
कोई घायल गिरा पड़ा हो
गिने आखिरी सांसें अपनी
रुक कर उसकी मदद करें तो
मानवता प्रस्तुत हो अपनी
एक नागरिक भी मरता है
एक युवा होता अपंग भी
देश भी थोड़ा मर जाता है
घायल होता राष्ट्र अंग भी
अपना अपना कर्म निभाओ
थोड़ी सी शुचिता अपनाओ
रखो सुरक्षित खुद को थोड़ा
राष्ट्र धर्म मे हाथ बटाओ
अपनी जो ये नव पीढ़ी है
राष्ट्र प्रगति की ये सीढ़ी है
अनुशासन में बांधो इसको
बड़े प्रेम से साधो इसको
जब बच्चा छोटा होता है
उसको चलना हमीं सिखाते
इन सड़कों पर चलने लायक
इन बच्चों को हमीं बनाते
इनको शिष्टाचार सिखाते
अनुशासन का पाठ पढ़ाते
फिर इनको हम वाहन देकर
सड़क नियम क्यों नहीं बताते ?
भावुकता में वाहन देकर
अनुमति देकर अपने मन से
अपने नाबालिग बच्चों को
करें न छल उनके जीवन से
चलना अब आसान नहीं है
सड़कें हैं, मैदान नहीं है
प्रतिपल परिवर्तित होते इस
युग का पूरा ज्ञान नहीं है
नियमों से अनभिज्ञ रहे तो
कैसे जीवन चल पाएगा ?
एक जरा सी चूक हुई तो
घर का सूरज ढल जाएगा
कोमल ऊर्जस्वित पीढ़ी की
उर्जा भी तूफानी हो
लेकिन इतना ध्यान रहे
ना , सड़कों पर मनमानी हो
अपने इस संचित साहस को
सड़कों पर ना व्यर्थ करें
दुस्साहस से बचें सड़क पर
ऐसा नहीं अनर्थ करें
सड़कें सबके हित की साधक
इनके होते हैं कुछ मानक
इन पर चलें सम्भल कर हरदम
बनें न दुर्घटना के कारक...!
💐💐💐💐
@ के डी सिंह
11 दिसम्बर 2021










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