कॉर्ल काटस्की Karl Kautskty

जागरण:काटस्की एक क्रांतिकारी समाजवादी विचारक है. प्रथम विश्वयुद्ध के उपरांत मार्क्सवादी सिद्धांतों की उपादेयता को क्रियान्वित करने के लिए काटस्की ने क्रांतिकारी समाजवाद का अनुसरण किया. कार्ल मार्क्स की भविष्यवाणी में कर्ज की अन्य आस्था और विश्वास रखता है इसी आधार पर काट के ने स्थापित किया कि बर्निस्टाइन का संशोधन वाद मार्क्स के सिद्धांत से पथ विचरण है.कांच की ने स्वीकार किया कि बस स्टैंड द्वारा प्रस्तुत संशोधन युग की आवश्यकता के अनुरूप है क्योंकि मार्क्स के सिद्धांतों का परिवेश एवं पर्यावरण प्रत्येक देश की सामाजिक आर्थिक संरचना के अनुसार पर्याप्त भिन्नता लिए हुए हैं. इसमें एकरूपता का अभाव है इसलिए marx के क्रांतिकारी विचारों का क्रियान्वयन नहीं हो पाएगा अतः मार्क्स के सिद्धांतों में परिवर्तन योग सापेक्ष है. कॉर्ल काटस्की
 बर्निस्टाइन के संशोधन वाद में उसे मात्रा व अनुपात तक विश्वास करता है जिस मात्रा व अनुपात तक विश्व की परिस्थितियों मार्क्स के सिद्धांतों के अनुरूप पर निर्मित नहीं हुई थी. इस प्रकार कार्य की वरिष्ठता इनके संशोधन वाद को स्वीकार करता परंतु कॉर्ल काटस्की श्रमिक वर्ग की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए क्रांतिकारी समाजवादी बना रहा. कांच की के अनुसार श्रमिकों की स्थिति में विशेष परिवर्तन नहीं हुआ श्रमिकों एवं उद्योग पतियों के मध्य वैमनस्य दुर्ग की तरह विद्यमान हैं उद्योगपतियों व श्रमिकों में समन्वय नहीं है इस प्रकार यथा स्थिति वाद की स्थिति बनी हुई है. कार्ड की के अनुसार परिवर्तन प्रकृति की नैसर्गिक प्रक्रिया है यह होकर रहेगा भले ही हिंसक अथवा अहिंसक ही क्यों ना हो. कार्ड स्किन स्पष्ट किया की पूंजी पतियों और श्रमिकों में निरंतर संघर्ष की स्थिति विद्यमान है इनके मध्य सामंजस्य एवं समन्वय की परिकल्पना तक संभव नहीं है जब तक की परिवर्तन के सुदृढ़ साधनों का उपयोग नहीं होता है. कार्ड की के अनुसार आर्थिक जीवन में परिवर्तन के साथ साथ राजनीतिक जीवन में भी परिवर्तन अवश्यसंभावी है. कार्ड की आशा भरे दृष्टि से घोषणा करता है कि परिवर्तन की प्रक्रिया को पूर्णता के रूप में प्राप्त करने के लिए आर्थिक प्रक्रिया में परिवर्तन नितांत आवश्यक है.परिवर्तन के लिए क्रमशाह वर्ग संघर्ष श्रमिकों में इक्टू की भावना अपनी मांगों के प्रति प्रतिबद्धता तथा परिवर्तन का दृढ़ संकल्प आवश्यक है. कार्ड की के अनुसार वर्तमान में पूंजी पति वर्ग प्रजातांत्रिक परिवेश एवं पर्यावरण में निरंतर परिवर्तन की ओर अग्रसर होगा तथा समाजवादी दल के प्रतिरोध के परिणाम स्वरुप पूंजी प्रति वर्ग का प्रजातांत्रिक माध्यम से सर्वहारा वर्ग में परिवर्तन हो जाएगा. यहीं पर कार्ड की समाजवादी क्रांतिकारी बन जाता है क्योंकि कार्ड की के अनुसार समाजवादी प्रजातांत्रिक दल का उदय जर्मनी के राजनीतिक जीवन के सबसे प्रमुख परिघटना है. जर्मन समाजवादी दल परिवर्तन सुनिश्चित करते हुए श्रमिकों की स्थिति में परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगा तथा श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में उन्नयन होगा.
जर्मन समाजवादी दल ने पूंजीपति वर्ग का संसद के अंदर व बाहर सड़क पर व्यापक प्रतिरोध किया. काल कार्ड्स की के प्रतिरोध के आधार पर मार्च के सिद्धांतों को प्रवर्तन में लाने का प्रबल पक्ष पोषक है.कार्ल मार्क्स के सिद्धांत जहां एक और क्रांतिकारी हैं वहीं दूसरी ओर इस पर स्वप्न लोक की एवं अमूर्त होने का आक्षेप लगाया जाता है. कल कार्स की नेक क्रांतिकारी मार्क्सवादी सिद्धांतों में विश्वास रखते हुए संशोधन वीडियो द्वारा प्रस्तुत मार्ग के सिद्धांत में परिवर्तन को असंगत वऔचित्य हिना बताते हुए यह प्रति दावा प्रस्तुत किया कि श्रमिकों की स्थिति में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं हुआ है. श्रमिकों की आर्थिक स्थिति निम्न अवस्था में है. श्रमिकों की स्थिति में परिवर्तन मात्र विधि बनाकर तथा राज्य की ओर से कुछ आंशिक कल्याणकारी कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन से नहीं आएगा. जब तक श्रमिक वर्ग अपनी संगठित शक्ति के माध्यम सेव्यवस्था में परिवर्तन नहीं करेगा तब तक श्रमिकों की वास्तविक स्थिति में परिवर्तन नहीं होगा.
कल कार्स की यथार्थवादी प्रक्रिया के परिवर्तन का वाहक है और उसके अनुसार मात्र राज्य की सरकार पर श्रमिकों के आधिपत्य करने से श्रमिकों का वास्तविक स्थिति में परिवर्तन नहीं आएगा.इसके विपरीत समाजवाद के मौलिक सिद्धांत के आधार पर समाज की वास्तविक संरचना में परिवर्तन के लिए बाध्यकारी विधियों का निर्माण नहीं होगा तब तक श्रमिकों की स्थिति में परिवर्तन की परिकल्पना साकार रूप से ग्रहण नहीं कर पाएगी.
इसलिए निभ्रान्त रूप से यह तथ्य सत्य है कि सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया में भौतिक या आर्थिक परिवर्तन की प्रक्रिया से ही पूर्ण  हो पाएगी. कांच की का स्पष्ट अभिमत है कि मार्क्स ने भौतिकवादी परिवर्तन की प्रक्रिया को सामाजिक परिवर्तन की पूर्णता के रूप में परिभाषित किया है. अतः वर्तमान समय में सबसे महत्वपूर्ण मांग है कि सामाजिक व्यवस्था व सामाजिक समन्वय. कांच की ने फ्रांसीसी समाजवादियों का आवाहन किया कि परिवर्तन के लिए श्रमिक वर्ग एकत्रित होकर संकल्प वध होकर परिवर्तन की आकांक्षा से राज्य की सत्ता प्राप्त करें तथा सत्ता के माध्यम से अनिवार्यता: व्यवस्था परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करें.इस क्रम में यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि आधिपत्य से श्रमिकों की वास्तविक स्थिति में परिवर्तन नहीं आएगा श्रमिकों की वास्तविक स्थिति में परिवर्तन उनके सामाजिक जीवन एवं संरचना में परिवर्तन अर्थात आर्थिक एवं भौतिक स्थितियों में परिवर्तन से ही संभव हो पाएगा. अतः कार्ड की का स्पष्ट अभिमत है की क्रांतिकारी सामाजिक स्थितियों में वास्तविक परिवर्तन भौतिक एवं आर्थिक स्थिति का परिवर्तन है. इस संदर्भ एवं परिप्रेक्ष्य में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि कार्ड की का समाजवाद राज्य के समान है.


Comments

Popular Posts