विज्ञान व रहस्यवाद क्या संगत है।

Prayagraj

किसी भी बस विषय का कर्म बिंदु ज्ञान जो अपने मानकों में हर जगह हर परिस्थिति में एक सा गुण धर्म प्रकट करें विज्ञान कहलाता है।
रहस्य विज्ञान को दिशा देने वाला एक अहम तत्व है जोकि वैज्ञानिक मानव जीवन को अद्भुत चीजों की खोज के लिए रास्ता प्रदान करता है और उन्हें प्रेरित करता है।
गुरुत्वाकर्षण बल की खोज बहुत ही कौतूहल भरा रहा है, एक सेब के पेड़ के नीचे न्यूटन बैठे थे तभी अचानक एक सेब का फल नीचे गिरा और वह इस प्रक्रिया को देख रहे थे। पेड़ से सेब का फल रह रह कर गिरता रहा और न्यूटन इस प्रक्रिया को निरंतर देखते रहे। पेड़ से फल का नीचे गिरना एक सामान्य सी प्रक्रिया है परंतु उन्हें उन्होंने अपने गेंद को खुले आकाश में फेंका तो कुछ क्षण बाद ही वह पुनः पृथ्वी पर वापस आ गिरा तो प्रकृत का यह विषय उनके लिए रहस्य था।

साइकिल चलाते हैं तो कुछ समय बाद अपने आप क्यों रुक जाती है क्या कोई अतिरिक्त बल औरत कार्य करता है जिसके कारण साइकिल रुक जाती है इस प्रकार न्यूटन कौतूहल भरा अध्ययन करते थे
 पहले के केस में उन्होंने गुरुत्वाकर्षण बल तथा दूसरे के परिघटना में उन्हें घर्षण बल का ज्ञान हुआ ठीक इसी प्रकार गैलीलियो भी पश्चिमी देश का विद्वान था जिन्होंने बताया कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती हैं सूर्य भी अन्य ग्रह का चक्कर लगाता है कोई भी वस्त ब्रह्मांड में स्थिर नहीं है हर ग्रह अपने से बड़े ग्रह का परिक्रमण करते थे यह खोज समाज विश्व के लिए विज्ञान था परंतु तात्कालिक विज्ञान की जानकारी चर्च के नियमों के खिलाफ थी क्योंकि उस समय पादरियों का वर्चस्व था जो की अपने आपको अंधविश्वास के कारण सर्वज्ञ समझते थे और तात्कालिक जनता उस समय अविश्वास से ग्रस्त थी अतः वह चर्च के नियम विनियम को परमात्मा के द्वारा निर्देशित कानून आदेश समझते थे


 अगर कोई व्यक्ति इस प्रकार की रीत रिवाज में चर्चा के नियमों के विपरीत दखलअंदाजी करता था तो उसे सूली पर चढ़ा दिया जाता था इस डर से गैलीलियो ने अपने जीते जी अपने तक ही सीमित रखा मरने के पश्चात उन्होंने इसे प्रकाशित करवाने का विचार रखा उनके मरने के कुछ माह पश्चात् गैलीलियो के द्वारा किए गए शोध का पता चला जिसके बाद इस सोच शोध को लेकर बढी  ।

वहां के पादरियों तथा आम जनता ने उनके किताब पर इस रहस्यमई घटना की विचार पर प्रतिबंध लगा दिया पुनः जब यह खोज विश्व के अन्य भागों द्वारा खोज की गई ऐसी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई की हर ग्रह परिक्रमा करते हैं तो उनकी खोज से चर्च के पादरी ओं तथा वहां के लोगों द्वारा ऐसे कृत्य के लिए उन्हें पुरस्कार दिया गया ।

भारत में प्राचीन काल में भास्कराचार्य द्वारा नक्षत्र विज्ञान ज्योतिष विज्ञान चरम पर था यहां के आर्यभट्ट ने पाइथागोरस प्रमेय को सर्वप्रथम सिद्ध किया लेकिन मध्य काल और आधुनिक काल में ज्ञान विज्ञान की प्रगति ना होने के कारण भारत का क्षेत्र दुनिया के अन्य देशों से और उत्साह भारत देश के तत्कालीन समय के लोग समुद्र पार जाकर ज्ञान विज्ञान की शिक्षा दीक्षा लेना व्यापार करना प्रकृति के विरुद्ध समझते थे जिस कारण उनका ज्ञान विज्ञान शोध सीमित क्षेत्र में ही फैला लीलावती श्रीधराचार्य गणित के महान खोज करता था मध्य काल के रामानुजम के बाद कोई श्रेष्ठ गणितज्ञ भारत में इस सूची में शोध के क्षेत्र में नजर नहीं आता है चक्की सुश्रुत संहिता आज भी विश्व में प्रसिद्ध है जो कि चिकित्सा क्षेत्र में आधार आधार हैं उस समय चरक ने शरीर में 213 हड्डियों की संख्या अपनी किताब में दी थी जो कि आज के विज्ञान के लगभग करीब है उन्होंने मृतक के शरीर को नदी के किनारे दवा देते थे तथा उस समय बाद 100 से उसकी सफाई करते थे समस्त मांस के शरीर से निकल जाने के पश्चात हड्डियों के विभिन्न संरचनाओं का अध्ययन करते थे शरीर के किस हड्डी में पेन क्यों आते थे इसका कारण क्या है मांस पेशियों में खिंचाव इसका मुख्य वजह है जिससे व्यक्ति परेशान हो जाता है कुछ समय हड्डी को मामूली रूप प्राप्त करता है उस समय दर्द होता ही समाप्त हो जाता है


भारत एक उदार चरित्र वाला राष्ट्र रहा है जिसके कारण यहां की जनता विश्व राष्ट्र की भावना आदर की सद्भावना से ओतप्रोत थी अतिथि देवो भव के सिद्धांत पर अमल कारी सत्ता और चरित्र के प्रति प्रतिबद्ध थी देश की आजादी के पहले नेहरू मार्च 1947 में विदेश संबंध स्थापित करने के लिए एक समिति का गठन किया जिसमें एशियाई देश के नेताओं ने भाग लिया समिति के सम्मेलन का उद्देश्य वैश्वीकरण के खिलाफ बिगुल बजाना राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाना देश की जनता को गरीबी भुखमरी से बाहर निकालना क्षेत्र में उत्तर उत्तर वृद्धि करना औद्योगिकरण करना केनेथ पर आधारित था सन 1955 में सम्मेलन एशिया में हुआ था जहां पर गुट निरपेक्षता की नीव पड़ी औ पंडित नेहरू तथा सुख लो घाना के राष्ट्रपति तथा दक्षिण अफ्रीका के नेता इस सम्मेलन में सम्मिलित थे नेहरू इंडोनेशिया को डच के उपनिवेश मुक्त दिलाना चाहते थे जिसके कारण इंडोनेशिया की जनता ने भारतीय नेता का पहले दिल जोरदार ढंग से स्वागत किया उस समय नेहरू विश्व की प्रतिष्ठित नेताओं में से थे और गिने-चुने एक थे जिनको अंतर्राष्ट्रीय पटल पर हाथी नेहरू क्रोएशिया संबंध की जोरदार वकालत करते थे वे चाहते थे कि एशियाई राष्ट्र में विश्व कप की भावना पर की जरूरत पड़ने पर एक राष्ट्र को एक दूसरे को विज्ञान तकनीक गरीबी उन्मूलन कृषि विकास में मदद तथा सामाजिक सांस्कृतिक राजनीतिक क्रियाकलापों में सार्थक मदद मिल सके एशियाई देशों में एशियाई और अफ्रीकी देशों का प्रतिनिधित्व था जो कि तत्कालीन परिपेक्ष में 9 सप्ताह बाद और विदेशी दासता से मुक्त हुए देश है द्वितीय विश्व युद्ध के समय भारत आजाद हुआ इस समय भारत विभाजक राष्ट्र के दौर से गुजर रहा था इस समय देश के संचित भरण पोषण के लिए अनाज उपलब्ध नहीं था असहाय और दुखी जनता थी मानव संसाधन उस समय देश में 17 करोड़ श्रमिक बूढ़े नौजवान स्त्री तथा बच्चे थे लेकिन इस समय लोगों के पास जमीन नहीं थी जमीदारों के पास बहुत बड़ी मात्रा में जमीन थी लेकिन उन्हें खाने भर का अपने गुलामों द्वारा खेती करवाएं से मिल जाता था लेकिन यह गुलाम जनता भयंकर निरक्षरता भूख कुपोषण बौद्धिक विचार में पतन मुखी भाव से संतुष्टि देश में जमींदार लोग खेती जैसे कार्यो में दिलचस्पी नहीं लेते थे ना ही कृष के नवीनीकरण फसली करण सिंचाई ख्वाब जैसे नवीन तकनीकों को अपनाने के प्रप्रति उपेक्षा भाव से ग्रस्त थे भारतीय मजदूर गुलाम जो जमीदारों के यहां खेती करता था वह भूमि मालिकों को सुझाव नहीं दे सकता था कि मालिक किस प्रकार से खेती की जाए और सिंचाई कब की जाए खेती वर्षा आधारित थी मजदूर कृषक सालभर खेती करने के पश्चात अगर वर्षा हौसला अनुकूल हो जाती थी तो फसल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा जमीदार को दे देता था तथा उपस्थित का न्यूनतम भाग जीवन यापन के लिए खुद लेता था इसके विपरीत चुकी फसल के उत्पादन के लिए भू स्वामी सिर्फ जमीन दी जाती थी इससे नारी के सफाई फसल की गुड़ाई के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन वह सुहाता नहीं दी जाती थी यहां तक कि जमीदार खेत को देखने भी नहीं जाता था अगर किसी वर्ष खेतिहर मजदूर को लास्ट में मेहनत करने के बावजूद मानसून साथ नहीं दिया तो फसल पूरी तरह सूख जाती थी और फसल उत्पादन का एक भी दाना खेतिहर मजदूर को नहीं मिल पाता था जिसके वह जिससे वह अपना भरण पोषण कर सकें आज का कृष स्वामी फसल के नष्ट होने पर कर्ज में डूबने के कारण कृषक मजदूर आत्महत्याकरता है तत्कालीन पर क्षेत्र में वह कृषक ना होकर खेतिहर मजदूर होता था वह और उसके परिवार को उचित भरण-पोषण अपार परिश्रम करने के बावजूद भी नहीं मिल पाता था पूरा का पूरा परिवार आत्महत्या तक सोच करने की आत्मीयता उन्हें नष्ट हो चुकी थी उनमें मानसिक और शारीरिक तौर पर इतने कमजोर वह महसूस करते थे कि आत्महत्या करने का प्रबंध सामर्थ्य भी उनमें नहीं था क्योंकि सामर्थ क्योंकि इतने कमजोर महसूस करते थे कि आत्महत्या का प्रबल सामान भी उनमें नहीं था क्योंकि सामर्थ वह सब हासिल होता है जब व्यक्ति के शरीर में दम हो व्यक्ति मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस करें यह लोग सेठ साहूकार जमीदारों द्वारा जैसी वैसे ही इतना दबे कुचले सताए हुए होते थे कि चतरा और सोचने का समय मिल सके वह हमेशा डर बोल गोरकी की अपराध भावना से दुखी और क्रोध से त्रस्त है वह अपना क्रोध किसी आने पर अपनी बीवी बच्चों पर उतरते थे उनके समय ही शारीरिक पोषण की असुरक्षा स्त्रियों पर समान था बल्कि पुरुषों की उपेक्षा उन्हें और दुखदाई और जर्जर तार और परिस्थितियों में रहने के लिए बाध्य थी प्रेमचंद गोदान की जो कि आजादी के पहले लिखा गया महत्वपूर्ण उपन्यास है ग्रामीण जीवन की संपूर्ण कथा की मर्मस्पर्शी ह्रदय विदारक हृदयस्पर्शी दृष्टांत वर्णन प्रस्तुत करती है कुछ विद्वानों ने यहां तक लिखा की गोदान उपन्यास में भारतीय लोगों के जीवन के लिए अतिथियों व पात्र भले ही तर्क संगत ना हो लेकिन मनुष्य जीवन की वास्तविकता आधुनिक इतिहास की जानकारी इस उपन्यास में पारदर्शी भाव पर ढंग से महसूस की जा सकती ।

Has the Non-Alignment Movement (NAM) Lost its Revalance in Multipolar World ? क्या गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नाम ) एक बहुध्रवीय विश्व में अपनी प्राथमिकता खो बैठा है ?
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विज्ञान व रहस्यवाद क्या संगत है।
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