Losses with Internet shutdown in Indian economy. इंटरनेट शटडाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान



भारत में सरकारी आदेश पर इंटरनेट सेवा को रोकना आर्थिक और सामाजिक विकास में बाधा साबित हो रहा है । इन सब के बावजूद भारत में यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जा रही है। सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन एट द ब्रुकिंग इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत और इराक में सरकारी आदेश पर इंटरनेट सेवा रोकने की घटना विश्व में सबसे अधिक देखी गई है।

 वस्तुतः भारत , अल्जीरिया और इराक के समान ही इंटरनेट सेवा को रोकने में स्थान प्राप्त कर चुका है और हर बार इसका कारण यह बताया जाता है कि परीक्षा में अनियमितता को रोकने हेतु सरकार इंटरनेट सेवा तक पहुंच को जानबूझकर रोकती हैं । नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर गवर्नेंस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत के 11 राज्यों में पिछले 2 वर्षों में 37 बार राज्य सरकार की ओर से इंटरनेट सेवाओं को रोका गया है ।

इस प्रकार यहां इंटरनेट सेवा में कोई बाधा से नागरिक स्वतंत्रता तथा आर्थिक एवं सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव तो पढ़ ही रहा है,  साथ ही भारत की संघीय संरचना भी प्रभावित हो रही है । सरकार द्वारा लागू  डिजिटल इंडिया प्रोग्राम द्वारा governance में सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है ।

इसका सीधा अर्थ लगाया जा सकता है कि इंटरनेट तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना,  सरकार की प्राथमिकता होगी ताकि सरकार सेवा प्रदान करने में हो सुगम हो सके।

 परंतु इंटरनेट सेवा में सरकार द्वारा बाधा पहुंच ही रही है, साथ ही साथ आम नागरिक की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है । यह सब इसलिए कि इंटरनेट शटडाउन की घटनाएं भारत में लगातार बढ़ती जा रही है। internet shutdown राज्यों की सरकारी एजेंसियों द्वारा की जा रही है तथा इसका आधार फौजदारी कानून के सन 1961 को बनाया गया है जो कि British Raj Sarkar से चला आ रहा है ।

यह वह समय था जब फौजदारी कानून के इस सेक्शन का इस्तेमाल पुलिस द्वारा व्यक्ति को डराने के लिए इस्तेमाल किया जाता था । जबकि जिला प्रशासन द्वारा इसका प्रयोग कर सामान्य प्रशासन को कठोरतम बनाने का प्रयास किया जाता था , ताकि नागरिक स्वतंत्रता को कम किया जा सके।

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