upsc में निबंध आवश्यक क्यों ?


निबंध का अर्थ है जोकि अपने शब्द सीमा कथानक में विभाजित ना हो, निबंध की संकल्पना, क्रमबद्ध, लिपिबद्ध, वैचारिक आलेख है जोकि उस व्यक्ति या संस्था के चरित्र के विषय में संपूर्ण समावेशी-सुसांस्कृतिक ढंग से रेखांकित करती है,  यह एक व्यक्ति की छाप है ,छाया है जिससे किसी व्यक्ति की अंतरमन की सुंदरता, स्वछता, आदर्श तथा उसके सांस्कृतिक व्यवहार की झलक प्रस्तुत करती है । किसी चीज की आवश्यकता ही चीज के प्रति या व्यक्ति के व्यक्तित्व का आकर्षण पैदा करती है।

 निबंध भी खुद में पिरोया हुआ, शब्दों में गुथा हुआ, एक व्यवहारिक आत्मकथा, कथानक है जो कि व्यक्ति या समाज के एक पहलू की भाव- व्यंजना व्यक्त करता है। निबंध चाहे वैज्ञानिक हो, चाहे आर्थिक हो, चाहे राजनीतिक हो, निबंध एक ऐसी विधा है जो कि खुद को कथानक, कहानी, लघु कहानी, उपन्यास, संस्मरण, आलोचना, व्यंग को खुद में समेटे हुए है।

 जब व्यक्ति को कुछ भी न समझ हो, कथानक कृत्य का ज्ञान न हो, फिर भी वह कुछ ना कुछ लिखना चाहता हो,  जो उस व्यक्ति की सोच, आत्मबोध की संवेदना, अपने वैचारिक पर्यावरणीय प्रदेश, तटस्थ समाज,भाईबंधु मित्र -रिश्तेदार आदि के बारे में कुछ ना कुछ लिखता है।

 एक तरफ नयनतारा सहगल है जो कि समाज पर लिखती हैं तो अपने लेखन शैली से समाज के एक व्यक्ति की हत्या किए जाने पर भारतीय समाज से प्राप्त प्रशस्ति-पत्र की लौटाने की बात करती हैं। कार्ला ब्रूनी, अखलाक नामक व्यक्ति जो समाज के एक प्रगतिशील वर्ग के सांस्कृतिक धार्मिक तथ्य आलेखों को धता-बताकर, गौ-मांस का कारोबार करता है, वह गौ मीट खाता है तो ऐसे व्यक्ति कुछ खुद की स्वार्थ में वशीभूत होकर, देश समाज के सरोकार को धता बताते हुए, पूरे समाज में खुद को वरिष्ठ घोषित करते हैं। समाज में ही रहकर समाज के साथ अन्याय करते हैं और समाज के ही नियम कानून को धता बताकर, खुद का नैतिक मूल्य को समाज के नैतिक मूल्य से श्रेष्ठ समझते हैं।

 एक सभ्य समाज जो कि अपने आप में सर्व समावेशी समाज है जो खुद को सामाजिक सांस्कृतिक ताने-बाने में समेटे हुए, कब तक, किस प्रकार से इस तरह व्यक्ति को माफ करेगा। गीता में श्रीकृष्ण भरे समाज में अपने मौसेरे भाई का वध तब तक नहीं किया,जिसका वह पात्र था, लेकिन इसके बावजूद भी जब वह अपनी परिस्थिति के अनुसार खुद को उस दरबारी माहौल में कृष्ण का बेजती करना ही, अपना मूलभूत अधिकार समझा, तो कृष्ण एक सीमा के बाद,धर्य खोकर शिशुपाल का वध कर दिया।

 समाज में लिंग भेदभाव की समस्या सदियों से चली आ रही है आज भी वह समाज में हावी है। इस विषय का मार्गदर्शन एक उत्कृष्ट निबंध ही कर सकता है।

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